प्रमोद अवस्थी मस्तूरी
मस्तूरी। सांदीपनी एकेडमी में “इंक्लूसिव एजुकेशन इन द डिजिटल एरा: एआई एक्सेसिबिलिटी एंड असिस्टिव टेक्नोलॉजी” विषय पर आयोजित पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का प्रथम दिवस सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में 150 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), आधुनिक तकनीक और समावेशी शिक्षा की नवीन अवधारणाओं से परिचित कराना है।
कार्यक्रम के प्रथम तकनीकी सत्र में सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, कोटा के डॉ. विकास कुमार तिवारी ने “फ्रॉम गुरुकुल टू जनरेटिव एआई: ट्रांसफॉर्मिंग टीचर एजुकेशन फॉर द फ्यूचर” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भारतीय गुरुकुल परंपरा से लेकर जनरेटिव एआई तक शिक्षक शिक्षा में आए बदलावों पर प्रकाश डालते हुए भविष्य की शिक्षा में तकनीकी नवाचारों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
द्वितीय तकनीकी सत्र में आईआईटी रुड़की के डॉ. अनुज शर्मा ने “फ्रॉम रसा टू रसायन: इंडियन हेरिटेज इन केमिस्ट्री” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, रसायन विज्ञान की ऐतिहासिक विरासत तथा प्राचीन भारतीय ज्ञान की वैज्ञानिक प्रासंगिकता पर विस्तार से अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के संरक्षक महेंद्र चौबे रहे, जबकि प्रशासनिक अधिकारी विनीत चौबे के मार्गदर्शन में आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. रीता सिंह, डॉ. दुर्गा बाजपेयी एवं डॉ. विभा मिश्रा रहीं। आयोजन सचिव के रूप में डॉ. श्रीति मजूमदार, डॉ. सुजाता सैमुअल एवं डॉ. अरविंद यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंच संचालन डॉ. दीप्ति सिंह राठौर ने किया।
दोनों तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों को आधुनिक शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिला। आगामी चार दिनों में भी विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न विषयों पर ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किए जाएंगे।



