*विधायक दिलीप लहरिया के प्रयासों से बजट में शामिल होने का दावा, अपने क्षेत्र की जर्जर सड़कों को लेकर भी उठाए सवाल*
मस्तूरी। क्षेत्र की जर्जर सड़कों को लेकर जिला पंचायत सदस्य द्वारा 2 नवंबर से भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दिए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच उनकी ही पार्टी के एक नेता ने उन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अनशन पर बैठने से पहले सड़कों से जुड़े तथ्यों की जानकारी लेना चाहिए।
नेता ने दावा किया कि जिन सड़कों के निर्माण की मांग को लेकर जिला सदस्य आंदोलन करने जा रहे हैं, उन्हें विधायक दिलीप लहरिया के प्रयासों से वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में पहले ही शामिल कराया जा चुका है। उनके अनुसार, दिसंबर 2025 में बजट तैयार किए जाने के दौरान ही इन सड़कों के लिए प्रावधान किया गया था। वर्तमान में स्वीकृति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही प्रशासकीय स्वीकृति जारी होने की उम्मीद है।
नेता ने बताया कि उन्होंने स्वयं लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों से चर्चा की है। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, सड़कों की स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि जब बजट में सड़कों को शामिल किया जा चुका है, तब जिला पंचायत सदस्य द्वारा अनशन की घोषणा करने का औचित्य क्या है?
अपने क्षेत्र की जर्जर सड़कों पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस के ही नेता ने जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 12 की सड़कों की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए किसान-परसदा से लिमतरा मार्ग, जयरामनगर से पाराघाट अंडरब्रिज मार्ग, एनएच-49 से देवगांव होते हुए हीर्री मार्ग तथा किरारी से भदौरा पहुंच मार्ग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन सड़कों पर आवागमन करने वाले ग्रामीणों और राहगीरों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने सवाल किया कि जब उनके अपने क्षेत्र की सड़कें जर्जर हैं, तो उनके निर्माण और मरम्मत के लिए वे कब अनशन पर बैठेंगे?
अंत में नेता ने कहा कि जनहित के मुद्दों पर आंदोलन करना गलत नहीं है, लेकिन आंदोलन तथ्यों और वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर होना चाहिए। राजनीति का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान करना होना चाहिए, न कि केवल मीडिया में सुर्खियां बटोरना।
हालांकि, बजट में शामिल सड़कों की स्थिति और प्रशासकीय स्वीकृति को लेकर संबंधित विभाग की आधिकारिक पुष्टि सामने आना बाकी है।



