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बस्तर ओलंपिक में खिलाड़ियों को नहीं मिला खाना, 50 से अधिक बच्चे भूखे लौटे

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चारामा में भोजन व्यवस्था की खुली पोल, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो; दो लाख रुपये से अधिक के बजट के उपयोग पर उठे सवाल

कांकेर। बस्तर के युवाओं को खेल के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ने और उनकी प्रतिभा को निखारने के उद्देश्य से आयोजित बस्तर ओलंपिक की चारामा में भोजन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 3 और 4 नवंबर को आयोजित ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिता के दौरान 50 से अधिक स्कूली छात्र-छात्राओं को दोपहर का भोजन नहीं मिलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि घंटों इंतजार के बाद भी भोजन नहीं मिलने से कई खिलाड़ी भूखे पेट ही अपने गांव लौट गए। इस अव्यवस्था का वीडियो एक खिलाड़ी छात्र ने बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जो तेजी से वायरल हो रहा है।

थाली लेकर कतार में खड़े रहे खिलाड़ी, खत्म हो गया खाना

प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचे खिलाड़ियों के अनुसार वे सुबह से ही मैदान में मौजूद थे। दोपहर में भोजन के लिए लंबी कतार लगी, लेकिन कई बच्चों को खाना नहीं मिल पाया। वायरल वीडियो में छात्र भोजन के लिए इंतजार करने और खाना खत्म होने की बात कहते सुनाई दे रहे हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि यदि पर्याप्त मात्रा में भोजन तैयार किया गया होता तो उन्हें भूखे पेट वापस नहीं लौटना पड़ता। खेल प्रतियोगिता में उत्साह के साथ पहुंचे बच्चों को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा, जिससे आयोजन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं।

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दो लाख रुपये से अधिक के बजट का हिसाब कौन देगा?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल आयोजन के लिए आवंटित बजट को लेकर उठ रहा है। जानकारी के अनुसार बस्तर ओलंपिक के आयोजन के लिए प्रत्येक ब्लॉक को दो लाख रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई गई है। इस राशि से खिलाड़ियों के लिए भोजन, पेयजल, परिवहन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की जानी थीं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब 50 से अधिक खिलाड़ियों के लिए भोजन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकी, तो आवंटित राशि का उपयोग किस मद में और किस प्रकार किया गया? आयोजन से जुड़े खर्चों के बिल-वाउचर और भोजन व्यवस्था की जांच की मांग भी उठने लगी है।

जिम्मेदार अधिकारियों से नहीं मिल पाया पक्ष

मामले में जनपद पंचायत चारामा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। ऐसे में भोजन व्यवस्था में हुई कथित लापरवाही और बजट के उपयोग को लेकर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आ पाया है।

खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने के दावों पर सवाल

एक ओर शासन बस्तर के युवाओं को खेल के माध्यम से बेहतर अवसर देने और उनकी प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ब्लॉक स्तरीय आयोजन में खिलाड़ियों को भोजन जैसी बुनियादी सुविधा नहीं मिलना व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है। बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के बच्चों में खेल के प्रति रुचि और विश्वास पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।

कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की मांग

अब सवाल यह है कि वायरल वीडियो और खिलाड़ियों की शिकायतों पर जिला प्रशासन कब संज्ञान लेगा? क्या चारामा में भोजन व्यवस्था की जांच कराई जाएगी? क्या आयोजन पर खर्च की गई राशि के बिल-वाउचर की जांच होगी? और यदि लापरवाही प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित एजेंसी पर कार्रवाई की जाएगी? खिलाड़ियों और अभिभावकों को अब प्रशासन की जांच और कार्रवाई का इंतजार है। बस्तर ओलंपिक का उद्देश्य युवाओं को प्रोत्साहित करना है, न कि उन्हें बुनियादी सुविधाओं के अभाव में निराश होकर घर लौटने के लिए मजबूर करना।

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