ब्लॉक स्तरीय आयोजन में अव्यवस्था से खिलाड़ियों में मायूसी, जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
कांकेर। ग्रामीण अंचलों की खेल प्रतिभाओं को सामने लाने और युवाओं को खेलों से जोड़ने के उद्देश्य से सरकार द्वारा बस्तर ओलंपिक जैसे बड़े आयोजन की पहल की जा रही है। लेकिन इस आयोजन को जमीनी स्तर पर सफल बनाने की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों की कथित लापरवाही के चलते सरकार की इस महत्वाकांक्षी पहल पर सवाल खड़े होने लगे हैं। ब्लॉक स्तरीय आयोजन में खिलाड़ियों की सुविधाओं और परिवहन व्यवस्था को लेकर सामने आ रही अव्यवस्थाएं आयोजन की तैयारियों की पोल खोल रही हैं।
हैरानी की बात यह है कि खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने पहुंच रहे खिलाड़ी बच्चों को सुरक्षित और व्यवस्थित वाहनों की जगह माल ढोने वाले वाहनों में ले जाने की स्थिति सामने आ रही है। जिस उम्र में इन बच्चों को खेल मैदान में अपनी प्रतिभा दिखाने और बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी, उसी उम्र में उन्हें आयोजन स्थल तक पहुंचने के लिए असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
बस्तर ओलंपिक का उद्देश्य दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों की छिपी खेल प्रतिभाओं को उचित मंच देना, युवाओं में खेल भावना विकसित करना और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है। लेकिन यदि ब्लॉक स्तर पर ही खिलाड़ियों के आवागमन, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं का ध्यान नहीं रखा जा रहा है, तो इस आयोजन की सफलता पर सवाल उठना लाजिमी है।
आयोजन को लेकर खिलाड़ियों और उनके परिजनों में काफी उत्साह रहता है, लेकिन व्यवस्थाओं में कमी के कारण बच्चों का उत्साह मायूसी में बदलता नजर आ रहा है। सवाल यह भी है कि जब सरकार खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए संसाधन उपलब्ध कराने की बात करती है, तो आखिर जिम्मेदार अधिकारी खिलाड़ियों के सुरक्षित परिवहन जैसी बुनियादी व्यवस्था सुनिश्चित क्यों नहीं कर पा रहे हैं?
अब जरूरत है कि संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पूरे मामले को गंभीरता से लें और आयोजन में हुई अव्यवस्थाओं की जांच कर जिम्मेदारी तय करें। खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित परिवहन, पेयजल, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि बस्तर ओलंपिक का उद्देश्य केवल कागजों तक सीमित न रहकर धरातल पर भी दिखाई दे।
अब सवाल यह है कि खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के नाम पर आयोजित इस प्रतियोगिता में खिलाड़ियों की सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी आखिर कौन उठाएगा?



