Punjab News: Amritpal Singh challenged the Punjab government for extending NSA detention, knocked the door of the High Court
जेल में बंद खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. लाइव लॉ के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का रुख करते हुए उन्होंने एनएसए को रद्द करने की मांग की है.
अपनी याचिका में सांसद अमृतपाल सिंह ने तर्क दिया है कि उसके जीवन और स्वतंत्रता को असामान्य और क्रूर तरीके से पूरी तरह से छीन लिया गया है.
उन्होंने ये भी कहा, ”न केवल उसके खिलाफ एक वर्ष से अधिक समय तक प्रिवेंटिव डिटेंशन कानून लागू किया गया बल्कि उसे उसके गृह राज्य से 2,600 किमी दूर हिरासत में रखा गया. उन्होंने कहा कि चूंकि उन्होंने संविधान के तहत शपथ ली है, इसलिए उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र और पंजाब राज्य के सर्वोत्तम हित का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार अर्जित किया है.”
खडूर साहिब लोकसभा सीट से सांसद अमृतपाल सिंह अभी असम के डिब्रूगढ़ की जेल में बंद हैं. अमृतपाल सिंह ने 5 जुलाई को संसद भवन पहुंचकर सांसद पद की शपथ ली थी. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने नवनिर्वाचित सांसद को संसद सदस्यता की शपथ दिलाई थी. 18वीं लोकसभा के पहले सत्र के दौरान नवनिर्वाचित सदस्यों ने शपथ ली थी लेकिन, जेल में होने के कारण अमृतपाल सिंह लोकसभा की सदस्यता की शपथ नहीं ले पाए थे.
कोर्ट में याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई की संभावना
हाई कोर्ट में याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई की संभावना है। अमृतपाल के अनुसार, यह तथ्य कि वह एक राजनीतिक संदेश पंजाब के लोगों को दे रहे थे, लोकसभा चुनाव में उनका चुना जाना पूरी तरह उचित प्रमाणित करता है।
संविधान में नहीं कोई विश्वास: अमृतपाल
अमृतपाल ने कहा कि लोकसभा चुनाव ने राज्य सरकार के गलत दुष्प्रचार को भी गलत साबित कर दिया है कि याचिकाकर्ता का संविधान में कोई विश्वास नहीं है क्योंकि चुनाव की प्रक्रिया ही प्रत्येक उम्मीदवार के लिए संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लेना व नामांकन पत्र दाखिल करते समय शपथ लेना अनिवार्य बनाती है।
अमृतपाल ने यह भी कहा कि उन्होंने लोकसभा सदस्य के रूप में चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद दूसरी बार भारत के संविधान की शपथ ली है और निर्वाचन क्षेत्र व पंजाब राज्य के सर्वोत्तम हितों का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार अर्जित किया है।
मेरे खिलाफ सभी कार्रवाई असंवैधानिक: अमृतपाल
अमृतपाल ने याचिका में कहा कि एनएसए के तहत उनकी हिरासत अवधि बढ़ाने का आधार मुख्य रूप से खुफिया सूचनाओं पर आधारित है। उनके खिलाफ सभी कार्रवाई असंवैधानिक, कानून के खिलाफ तथा राजनीतिक असहमति के कारण दुर्भावनापूर्ण हैं और उन आधारों पर नहीं हैं जिनके आधार पर निवारक हिरासत का आदेश दिया जा सकता है, अत: इसे तुरंत रद किया जाना चाहिए।



