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“अचानकमार में सड़क पर संग्राम : 10 लाख की सीसी सड़क पर वन विभाग की रोक से बवाल”

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Road Tussle in Achanakmar: Uproar Over Forest Department’s Halt on ₹10 Lakh Concrete Road Project

= बैगा आदिवासियों ने मूलभूत सुविधाओं से वंचित करने का लगाया आरोप

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मुंगेली। अचानकमार टाइगर रिजर्व क्षेत्र अंतर्गत अचानकमार ग्राम पंचायत में विधायक मद से स्वीकृत लगभग 10 लाख रुपये की लागत वाली सीसी सड़क निर्माण योजना अब बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद बनती जा रही है। एक ओर छत्तीसगढ़ सरकार वनांचल क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर वन विभाग और ग्राम पंचायत के बीच अनुमति को लेकर पैदा हुआ विवाद अब खुले टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
अचानकमार ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्वीकृत सीसी सड़क निर्माण कार्य पर वन विभाग द्वारा कथित रोक लगाए जाने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। पूरे मामले में वन विभाग की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि आदिवासी क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विकास कार्यों में विभागीय अड़चनें खड़ी की जा रही हैं।
👉 विधायक मद से स्वीकृत हुआ सीसी सड़क निर्माण कार्य
जनपद पंचायत लोरमी द्वारा जारी कार्यादेश के अनुसार अचानकमार ग्राम पंचायत क्षेत्र में लगभग 10 लाख रुपये की लागत से सीसी सड़क निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया है। सड़क निर्माण का उद्देश्य गांव के अंदर आवागमन को सुगम बनाना और ग्रामीणों को बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराना बताया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण होने से बरसात के दिनों में होने वाली भारी परेशानियों से राहत मिल सकती है। गांव के कई हिस्सों में आज भी कच्चे रास्ते होने के कारण लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
कार्यादेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि निर्माण कार्य शासकीय भूमि पर होगा तथा तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद ही निर्माण प्रारंभ किया जाएगा। साथ ही निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

👉“अनुमति नहीं ली गई” — DFO यू.आर. गणेश का पक्ष,

पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल वन विभाग की अनुमति को लेकर खड़ा हुआ है। सूत्रों के अनुसार डीएफओ यू.आर. गणेश का कहना है कि ग्राम पंचायत अचानकमार द्वारा सीसी सड़क निर्माण के लिए वन विभाग से अनुमति नहीं ली गई है, इसलिए अनुमति प्रदान नहीं की गई।

बताया जा रहा है कि अचानकमार ATR के कोर जोन और बफर जोन से जुड़े संवेदनशील क्षेत्र में आता है, जिसके कारण वन विभाग निर्माण कार्यों को लेकर सतर्कता बरत रहा है।

हालांकि जब मीडिया ने विस्तृत पक्ष जानने का प्रयास किया तो डीएफओ ने सार्वजनिक रूप से ज्यादा टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उनकी इस चुप्पी ने विवाद को और बढ़ा दिया है।
👉 ग्राम पंचायत ने उठाए सवाल
ग्राम पंचायत अचानकमार की सरपंच श्रीमति मीना देवी आनंद ने कहा कि पंचायत क्षेत्र में वर्षों से पानी, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े कार्य होते रहे हैं, लेकिन पहली बार इस तरह की रोक की स्थिति सामने आई है।
उनका कहना है कि जब शासन स्तर से स्वीकृति, तकनीकी प्राक्कलन और कार्यादेश जारी हो चुका है, तो फिर विभागीय स्तर पर निर्माण कार्य में बाधा क्यों उत्पन्न की जा रही है। पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि इससे ग्रामीण विकास प्रभावित हो रहा है।
👉 2014 में राजस्व ग्राम घोषित हो चुका है अचानकमार
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2014 में अचानकमार को वन ग्राम से राजस्व ग्राम घोषित किया जा चुका है। ग्रामीणों का तर्क है कि जब गांव को राजस्व ग्राम का दर्जा मिल चुका है और पंचायत स्तर पर विकास कार्य स्वीकृत हैं, तो फिर सड़क निर्माण पर रोक लगाने का आधार क्या है।
ग्रामीणों का कहना है कि शासन की योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचना चाहिए, लेकिन विभागीय प्रक्रियाओं के कारण विकास कार्य अटक रहे हैं।
👉 बैगा आदिवासियों में भारी नाराजगी
अचानकमार क्षेत्र में निवास करने वाले बैगा आदिवासी समुदाय के लोगों ने सड़क निर्माण रुकने पर नाराजगी जाहिर की है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में गांव का संपर्क प्रभावित हो जाता है और कई बार मरीजों को अस्पताल तक ले जाना भी मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस तक गांव नहीं पहुंच पाती। कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग की प्रक्रियाओं के नाम पर आदिवासी क्षेत्रों के विकास कार्य वर्षों से प्रभावित होते रहे हैं।
ग्रामीणों ने इसे मूलभूत सुविधाओं से वंचित करने जैसा कदम बताया है।
👉 विकास योजनाओं पर उठ रहे सवाल
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज हो गई है कि सरकार द्वारा वनांचल क्षेत्रों में सड़क और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की बातें की जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर विभागीय समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शासन स्तर से स्वीकृति मिलने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है, तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
👉 विपक्ष ने भी खोला मोर्चा
मामले ने अब राजनीतिक रूप लेना शुरू कर दिया है। विपक्षी दलों के नेताओं ने ग्रामीणों को समर्थन देते हुए कहा है कि आदिवासी क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं को रोकना जनता के अधिकारों के खिलाफ है।
विपक्ष ने मांग की है कि यदि शासन के आदेश और कार्यादेश के बावजूद कार्य बाधित हो रहा है तो पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।
👉 कार्यादेश में क्या-क्या शर्तें?
जनपद पंचायत द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है—
निर्माण कार्य शासकीय भूमि पर होगा
तकनीकी स्वीकृति के बाद ही कार्य प्रारंभ होगा
कार्य ठेकेदारी प्रथा से नहीं कराया जाएगा
स्थल की फोटोग्राफी अनिवार्य होगी
समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट देनी होगी
निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण करना होगा
इसके बावजूद यदि निर्माण कार्य अटकता है तो विभागीय समन्वय और प्रशासनिक प्रक्रिया दोनों सवालों के घेरे में आ रहे हैं।
👉 आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सीसी सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे विकास कार्यों में देरी और विभागीय अड़चनों को और बर्दाश्त नहीं करेंगे।
फिलहाल अचानकमार ग्राम पंचायत की 10 लाख रुपये की सीसी सड़क का मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक राजनीतिक तथा प्रशासनिक तूल पकड़ सकता है।

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