Home कांकेर अतिसंवेदनशील रहे ग्राम पंचायत सितरम में कलेक्टर ने लगाई चौपाल

अतिसंवेदनशील रहे ग्राम पंचायत सितरम में कलेक्टर ने लगाई चौपाल

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*शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी को अपने बीच पाकर गदगद हुए ग्रामीण*

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*बस्तर मुन्ने और सुशासन तिहार के तहत आयोजित शिविर में योजनाओं का लाभ लेने के लिए ग्रामीणों से की अपील*

*ग्राम सितरम के परलकोट क्षेत्र में शहीद गैंद सिंह स्मारक परिसर में सामुदायिक भवन और दंतेश्वरी माई मंदिर के जीर्णाेद्धार हेतु दी स्वीकृति*

उत्तर बस्तर कांकेर, 13 मई 2026/ कभी भय और लाल आतंक की आग़ोश में रहने वाले ग्राम पंचायत सितरम के लिए आज का दिन बड़ा खुशनुमा रहा। दुर्गम और बीहड़ क्षेत्र में नारायणपुर जिले की सरहद से लगी ग्राम पंचायत सितरम में जिले के कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने ग्रामीणों के बीच चौपाल लगाई और उनकी बहुप्रतीक्षित समस्याओं की जानकारी ली।

बस्तर मुन्ने और सुशासन तिहार के तहत ग्राम पंचायत सितरम में आज शिविर का आयोजन किया गया। कलेक्टर श्री क्षीरसागर और जिला पंचायत सीईओ श्री हरेश मंडावी आज सुबह लगभग 11 बजे 6 से 7 किलोमीटर कच्चे मार्ग से होते हुए ग्राम सितरम पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने उनका परंपरागत ढंग से स्वागत किया। जिले के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को अपने बीच पाकर ग्रामीण काफी प्रसन्न और गदगद हुए। कलेक्टर ने ग्रामीणों के बीच कुसुम पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि यह क्षेत्र कई दशकों तक नक्सलवाद के प्रभाव में रहा जिसकी वजह से ग्रामीण विकास से वंचित रहे। चूंकि अब नक्सलवाद समाप्त हो चुका है शासन की मंशानुसार प्राथमिकता से विकास कार्यों का जल्द से जल्द क्रियान्वयन होगा। उन्होंने बताया कि बस्तर मुन्ने और सुशासन तिहार के तहत यह शिविर आयोजित किया गया है, जिसमें 14 आधारभूत अधोसंरचनाओं और 31 व्यक्तिमूलक योजनाओं के शत प्रतिशत संतृप्तिकरण का कार्य किया जाएगा, जब तक प्रत्येक पात्र हितग्राही को शासन की योजनाओं का लाभ न मिल जाए। कलेक्टर ने कहा कि लंबे अरसे तक माओवाद का दंश झेल रहे ग्रामीणों का राशन कार्ड, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, जॉब कार्ड, वन अधिकार मान्यता पत्र आदि बनाए जाएंगे तथा ग्रामीणों को विकास से जोड़कर योजनाओं का लाभ दिलाने प्रशासन द्वारा हरसंभव प्रयास किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने परलकोट के शहीद गैंद सिंह परिसर में सामुदायिक भवन, घोटुल भवन तथा क्षेत्र की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी मंदिर के जीर्णोद्धार की स्वीकृति प्रदान की। कलेक्टर श्री क्षीरसागर ने ग्रामीणों से बारी-बारी से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं और यथासंभव कार्रवाई कर निराकरण करने की बात कही। कलेक्टर ने परलकोट के शहीद गैंद सिंह के स्मारक का अवलोकन किया तथा प्राचीन दंतेश्वरी माई मंदिर में जाकर जिलावासियों की खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगा।

इस दौरान ग्राम पंचायत सितरम के सरपंच श्री गणेश नायक ने राजस्व तथा वन भूमि का सीमांकन कराने और नारायणपुर जिले में आने वाली वन भूमि को कांकेर जिले में सम्मिलित करने की मांग की, जिस पर कलेक्टर ने राजस्व और वन विभाग के अधिकारियों को परस्पर समन्वय के साथ चिन्हांकन करने के निर्देश दिए। इसके अलावा सरपंच ने राजा मुंडा शाला भवन, प्री मेट्रिक छात्रावास, देवगुड़ी निर्माण, सर्व समाज सामुदायिक भवन, स्वागत द्वार निर्माण, हाई मास्ट सोलर लाइट, मिट्टी मुरूम सड़क निर्माण, सीसी रोड निर्माण, वन अधिकार पट्टा इत्यादि मांगों से कलेक्टर को अवगत कराया। उन्होंने यह भी बताया कि ग्राम पंचायत सितरम के आश्रित ग्राम राजामुंडा, शेरमुंडा, छिंदपदर और कोंगे है एवं 254 परिवार तथा जनसंख्या 1169 है। यहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत यहां 121 आवास स्वीकृत हैं जिनमें से 08 पूर्ण हो चुके हैं। उक्त पंचायत में 262 जॉब कार्ड धारक हैं। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्री हरेश मंडावी, एसडीम पखांजूर श्री मनीष देव साहू, जनपद पंचायत कोयलीबेड़ा के सीईओ श्री नाग सहित पुलिस एवं विभिन्न विभागों के ब्लॉक स्तर के अधिकारीगण मौजूद थे।

*बारिश के दिनों में टापूनुमा ग्राम सितरम का जंगल माओवादियों का सुरक्षित ठिकाना था*

दो नदियों के बीच टापूनुमा ग्राम सितरम बारिश के मौसम में 3 से 4 महीने तक संपर्कविहीन हो जाता है, जिसके चलते यह क्षेत्र माओवादियों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता था। इसकी वजह से ग्राम सितरम कई मायनों में विकास से अछूता रहा। माओवाद के पतन के बाद राज्य शासन की मंशानुसार अब जिले के ऐसे ग्रामों में प्राथमिकता के साथ विकास कार्यों को क्रियान्वित किया जा रहा है।

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