How BJP’s Saroj Pandey lost in Korba, despite having 2 ministers and 6 MLAs, understand the reasons for her defeat in 10 points
रायपुर। छत्तीसगढ़ की कोरबा संसदीय सीट से कांग्रेस की सांसद ज्योत्सना महंत दूसरी बार निर्वाचित हुई हैं। उन्होने बीजेपी प्रत्याशी सरोज पाण्डेय को 50 हजार से अधिक मतों से पराजित कर दिया। जबकि, ज्योत्सना महंत का इलाके मे काफी विरोध था। उनकी निष्क्रियता और संसदीय इलाके की सुध न लेने पर कांग्रेस के लोग भी खुश नहीं थे। बावजूद इसके ज्योत्सना महंत के पति चरणदास महंत ने ऐसी चक्रव्यूह बनाई कि सरोज पाण्डेय उसे भेद नहीं पाईं। चरणदास महंत कांग्रेस के दिग्गज नेता हैं। कई बार विधायक, सांसद, मध्यप्रदेश में मंत्री, केंद्रीय राज्य मंत्री के साथ छत्तीसगढ़ विधानसभा के स्पीकर रह चुके हैं। अभी वे नेता प्रतिपक्ष हैं। 10 बिंदुओं में जानिये चरणदास महंत के सियासी दांव में सरोज पाण्डेय कैसे उलझ गईं।
सरोज पाण्डेय की हार के 10 कारण…
1. बाहरी प्रत्याशी
दुर्ग की रहने वाली सरोज पाण्डेय को बीजेपी ने करीब 250 किलोमीटर दूर कोरबा से मैदान में उतारा था। मगर वोटिंग के आखिरी दिन तक वे बाहरी का ठप्पा नहीं हटा पाईं। यहां तक कि विरोधियों द्वारा सिर्फ सीट से बाहरी नहीं, प्रदेश की बाहरी याने यूपी वाली नेत्री स्थापित कर दिया गया। इसका उन्हें काफी नुकसान हुआ।
2. जोगी कांग्रेस पर भरोसा
पाली तानाखार जैसे इलाकों में, जहां से ज्योत्सना महंत को इस बार 48 हजार कल लीड मिली, वहां जोगी कांग्रेस पर भरोसा करना सरोज पाण्डेय को भारी पड़ा। बीजेपी के पुराने नेता और कार्यकर्ता इससे नाराज हो गए।
3. पार्टी में ही विरोध
बाहर से प्रत्याशी भेजे जाने से बीजेपी के लोकल नेताओं ने सरोज पाण्डेय को दिल से स्वीकार नहीं किया। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी इलाके में रेणुका सिंह और भैयालाल राजवाड़े के लोगों ने सरोज पाण्डेय के लिए उस तरह से काम नहीं किया, बल्कि उधर डैमेज ज्यादा हुआ सरोज पाण्डेय का।
4. बाहरी लोगों के जरिये काम
जोगी कांग्रेस को बीजेपी में शामिल कर उन्हें अहम दायित्व सौंपा गया। उधर, चुनाव प्रचार में भी लोकल बॉडी पर विश्वास नहीं किया गया। मंडल अध्यक्षों को संसाधन तो दिए गए मगर उसकी निगरानी दुर्ग और भिलाई के लोग कर रहे थे। उपर से एक एजेंसी लगा दी गई थी कि कहां क्या दिया गया। याने त्रिस्तरीय व्यवस्था। मध्यप्रदेश, यूपी और महाराष्ट्र के लोग भी सरोज पाण्डेय के लिए काम करते दिखे। यहां तक कि कई जगहों पर पोलिंग और काउंटिं एजेंट भी दुर्ग से रहे। बीजेपी कार्यकर्ताओं में इसके मैसेज अच्छे नहीं गए।
5. कारोबारियों का विरोध
कोरबा संसदीय इलाके में बिजली, कोयला, स्टील समेत अनेक तरह के उद्योग हैं। कारोबारी शुरू से सरोज पाण्डेय का विरोध कर रहे थे क्योंकि, वे अगर जीत कई तो भिलाई तरफ के लोग कोरबा आकर काम करने लगेंगे। फिर सरोज पाण्डेय तेज तेवर वाली नेत्री हैं, उनसे मिलना मुश्किल होगा।
6. लोकल, छत्तीसगढ़ियावाद और ओबीसी
चरणदास महंत ने पूरा कैम्पेनिंग छत्तीसगढ़ियावाद और ओबीसी पर फोकस कर दिया था। मगर सरोज पाण्डेय ऐसा नहीं कर पाई। जबकि, महंत ने इन तीनों चीजों का जमकर इस्तेमाल किया। जांजगीर से वे करीब तीन दशक से राजनीति कर रहे हैं और इसी लोकसभा इलाके में कोरबा भी आता था, सो वे इस इलाके से उनका जीवंत संपर्क बना हुआ था।
7. ब्राम्हणों का भी साथ नहीं
सरोज पाण्डेय ब्राम्हण हैं मगर उन्हें ब्राम्हणों का भी साथ नहीं मिला। दरअसल, छत्तीसगढ़ में लोकल ब्राम्हण रीवा या यूपी तरफ के ब्राम्हणों को बाहरी मानते हुए दुरियां बनाकर रखते हैं। लिहाजा, ब्राम्हण वोट भी उन्हें वैसा नहीं मिला, जैसी की उम्मीद थीं।
8. गोंडवाना का नहीं साध पाई
कोरबा संसदीय सीट पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को मिले वोटों से जीत-हार तय होता है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से पहले तुलेश्वर सिंह मरकाम का नाम चला था मगर टिकिट मिल गई मनेंद्रगढ़ इलाके के श्याम सिंह को। पता चला है, चरणदास महंत ने गोंगपा से बात कर श्याम सिंह को प्रत्याशी बनवाया और श्याम सिंह उस तरह से काम नहीं किए। उससे कांग्रेस को फायदा हुआ। श्याम सिंह को करीब 45 हजार वोट मिले। जबकि, 55-60 हजार के आसपास गोंडवाना को वोट मिलते रहे हैं।
9. विधायकों का साथ नहीं
कोरबा लोकसभा इलाके में आठ विधानसभा हैं। इनमें से छह पर भाजपा के विधायक हैं। मगर सिर्फ कोरबा शहरी सीट को छोड़ दें तो सरोज पाण्डेय सभी सीटों पर पिछड़ गई। कोरबा में मोदी मैजिक और मंत्री लखनलाल देवांगन के चलते करीब 50 हजार की लीड मिल गई। बाकी मरवाही में बीजेपी का विधायक होने के बाद भी सरोज पाण्डेय वहां से 18 हजार मातों से पीछे हो गई।
10. हाई प्रोफाइल प्रचार
सरोज पाण्डेय का प्रचार हाई प्रोफाइल रहा। जबकि, चरणदास महंत और ज्योत्सना महंत ने छोटी-छोटी चौपाल नुमा सभाएं की। छोटी सभाएं में भाषण कम चर्चाएं और लोगों की सुनने का काम ज्यादा करते थे। इससे बड़ा फायदा यह हुआ कि लोगों की नाराजगी दूर हो गई। ज्योत्सना महंत की निष्क्रियता के आरोपों को चरणदास महंत सुनकर, कंधे पर हाथ रखकर कार्यकर्ताओं को संतुष्ट कर दिए। ज्योत्सना महंत के जितने भी पोस्टर लगे थे, उसमें चरणदास महंत की भी फोटो होती थी। ताकि, लोग चरणदास महंत वोट मांग रहे हैं।
हार की होगी समीक्षा
कोरबा लोकसभा क्षेत्र में साय सरकार के दो- दो कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन और श्याम बिहारी जायसवाल भी पार्टी की राष्ट्रीय नेता को जीत नहीं दिला सके। ऐसे निश्चित तौर पर पार्टी इस बात की समीक्षा करेगी। केन्द्रीय गृह मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता अमित शाह ने भी सरोज पाण्डेय के लिए चुनावी सभा की थी।
डा. सरोज पांडे ने कोरबा लोकसभा चुनाव से नया कीर्तिमान रचा
लोकसभा चुनाव 2024 में कोरबा लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी रहीं दीदी सरोज पांड़े को निवर्तमान सांसद ज्योत्सना मंहत मात देने जा रही है. हालांकि अभी अंतिम परिणाम घोषित नहीं हुआ है, लेकिन सरोज पांडे निकटतम प्रतिद्वंदी ज्योत्सना मंहत से 23,000 से अधिक वोटों से पीछे चल रही हैं.
छत्तीसगढ़ की 11 सीटों में 10 सीटों पर भाजपा ने बनाई है अजेय बढ़त
दुर्ग नगर निगम महापौर से लेकर राज्यसभा सासंद का सफर तय कर चुकी भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष सरोज पांडे का रिकॉर्ड अभी कोई नहीं तोड़ पाया है. एग्जिट पोल के अनुमान के मुताबिक छ्त्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीट में 10 सीटें भाजपा के खाते में जाने का अनुमान है, यह मतगणना में नजर भी आया है, लेकिन कोरबा लोकसभा सीट पर सरोज पांडे हार रही हैं.
डॉ.सरोज पांडेय एक साथ महापौर, विधायक और सांसद रह चुकी हैं
एक साधारण परिवार से आने वाली सरोज पांडेय बेहद ही कम उम्र में ही राजनीति में बड़ा कारनामा करने पहली महिला के रुप में शुमार हो चुकी है. डॉ.सरोज पांडेय एक साथ महापौर, विधायक और सांसद रह चुकी हैं. सरोज पांडे का यह रिकॉर्ड गिनीज और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज है.
10 सालों तक महापौर रहीं सरोज पांडे 2008 पहली बार विधायक चुनी गईं
कॉलेज के दौरान छात्र राजनीति में सक्रिय रहीं सरोज पांडेय का जन्म दुर्ग जिले में हुआ था और दुर्ग जिले सक्रिय रहते हुए भाजपा में आ गईं. 10 सालों तक महापौर रहीं सरोज पांडे 2008 पहली बार विधायक चुनी गईं. वैशाली नगर निगम से पहली बार विधायक चुनी गई सरोज पांड़े मे साल 2009 में दुर्ग लोकसभा सीट से सांसद चुनी गईं
2013 में भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनी गईं डा. सरोज पांडे
साल 2013 में भारतीय जनता पार्टी द्वाका महिला मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्ति की गईं डा. सरोज पांडे को दोबारा साल 2014 दुर्ग लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया, लेकिन इस बार सरोज पांडे की किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया. हर बार किस्मतों से रिकॉर्ड दर रिकॉर्ड दर कायम करती आ रहीं मौजूदा राज्यसभा सरोज पांडे को कांग्रेस प्रत्याशी ने हराया.


