उत्तर बस्तर कांकेर 12 मई 2026/ नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग संबंधी सलाह देते हुए कृषि विभाग के उप संचालक जितेन्द्र कोमरा ने बताया कि नैनो यूरिया इफको द्वारा विकसित नैनो तकनीक पर आधारित तरल उर्वरक है, जो पारंपरिक दानेदार यूरिया का एक आधुनिक और प्रभावी विकल्प है। यह 500 मिली की बोतल में आता है और नाइट्रोजन की कमी को पूरा करता है। 500 मिली की एक बोतल सामान्य यूरिया के एक पूरे बैग (45-50 किग्रा) के बराबर पोषक तत्व प्रदान करती है, जिससे किसानों की लागत कम होती है और पैदावार बढ़ती है।
नैनो यूरिया की मुख्य विशेषताएं और फायदों के संबंध में जानकारी देते हुए उप संचालक ने कृषि ने बताया कि इसमें मौजूद नैनो-कण (20-50 नैनोमीटर) पौधों की पत्तियों के रंधों के माध्यम से आसानी से अवशोषित हो जाते हैं, जिससे नाइट्रोजन उपयोग दक्षता 80 प्रतिशत से अधिक बढ़ जाती है। यह निट्टी की सेहत को सुधारता है और लीचिंग व गैसीय उत्सर्जन को कम करता है। फसल की सक्रिय वृद्धि के दौरान 2-4 मिली नैनो यूरिया प्रति लीटर पानी में मिलाकर पत्तियों पर स्प्रे किया जाता है। लागत में कमी 500 मिली की बोतल का मूल्य सामान्य यूरिया के एक बोरे से बहुत कम है, जिससे खेती की लागत घटती है।
उपयोग की विधि
अति शीघ्र अवधि किस्में (80 से 100 दिन) धान की बोवाई अथवा रोपाई के 30-35 दिनों के पश्चात् प्रथम स्प्रे प्रति एकड़ नैनो यूरिया (16 प्रतिशत) की 500 मि.ली. मात्रा को 125-150 लीटर पानी में घोलकर खड़ी फसल में पर्णीय छिड़काव किया जाना चाहिए तथा द्वितीय स्प्रे धान की बोवाई अथवा रोपाई के 55-60 दिनों पश्चात् प्रति एकड़ नैनो यूरिया (16 प्रतिशत) की 500 मि.ली. मात्रा को 125-150 लीटर पानी में घोलकर खड़ी फसल में पर्णीय छिड़काव किया जाए। इसी प्रकार शीघ्र अवधि बौनी किस्में (100-110 दिन) की धान फसल में बोवाई अथवा रोपाई के 30-35 दिनों पश्चात् प्रथम स्प्रे प्रति एकड़ नैनो यूरिया (16 प्रतिशत) की 500 मि.ली. मात्रा को 125-150 लीटर पानी में घोलकर खड़ी फसल में पर्णीय छिडकाव किया जावे। द्वितीय स्प्रे धान की बोवाई अथवा रोपाई के 55-60 दिनों पश्चात् प्रति एकड़ नैनो यूरिया (16 प्रतिशत) की 500 मि.ली. मात्रा को 125-150 लीटर पानी में घोलकर खड़ी फसल में पर्णीय छिड़काव किया जाना चाहिए। इसी प्रकार मध्यम अवधि किस्मों (110-125 दिन) की धान फसलों में प्रथम स्प्रे धान की बोवाई अथवा रोपाई के 45-50 दिनों पश्चात् प्रति एकड़ नैनो यूरिया (16 प्रतिशत) की 500 मि.ली. मात्रा को 125-150 लीटर पानी में घोलकर खड़ी फसल में पर्णीय छिड़काव करें। द्वितीय स्प्रे धान की बोवाई अथवा रोपाई के 75-80 दिनों पश्चात् प्रति एकड़ नैनो यूरिया (16 प्रतिशत) की 500 मि.ली. मात्रा को 125-150 लीटर पानी में घोलकर खड़ी फसल में पर्णीय छिड़काव किया जावे।
मध्यम से अधिक अवधि किस्में (126-140 दिन) की धान फसलों में प्रथम स्प्रे धान की बोवाई व रोपाई के 45-50 दिनों पश्चात् प्रति एकड़ यूरिया (16 प्रतिशत) की 500 मि.ली. मात्रा को 125-150 लीटर पानी में घोलकर खड़ी फसल नैनो यूरिया में पर्णीय छिड़काव करें। द्वितीय स्प्रे धान की बोवाई अथवा रोपाई के 85-90 दिनों पश्चात् प्रति एकड़ नैनो यूरिया (16 प्रतिशत) की 500 मि.ली. मात्रा को 125-150 लीटर पानी में घोलकर खड़ी फसल में पर्णीय छिड़काव करें।
नैनो डी.ए.पी.
नैनो डीएपी इफको द्वारा विकसित दुनिया का पहला तरल नैनो-तकनीक आधारित उर्वरक है। यह पारंपरिक डीएपी (डाई-अमोनियम फास्फेट) का एक उन्नत, कुशल और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है, जिसमें 8 प्रतिशत नाइट्रोजन और 16 प्रतिशत फास्फोरस होता है। 500 मिलीलीटर की एक बोतल पारंपरिक 50 किलोग्राम की डीएपी बोरी के बराबर पोषण प्रदान करती है।
नैनो डीएपी की मुख्य विशेषताएं और फायदे
नैनो-कण (100 नैनो मीटर से कम) आकार के कारण यह पत्तियों के छिद्रों और बीजों की सतह से आसानी से अवशोषित हो जाता है, जिससे पोषक तत्वों की उपलब्धता 90 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। यह पौधों की जड़ों को मजबूत करता है, क्लोरोफिल बढ़ाता है और फसल की उपज व गुणवत्ता में सुधार करता है। एक बोतल की कीमत केवल 600 रूपए है, जो पारंपरिक डीएपी बोरी (1350 रूपए) की तुलना में बहुत सस्ती है, जिससे किसानों की लागत कम होती है। यह मिट्टी, जल और वायु प्रदूषण को कम करता है और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देता है। इसे बीज उपचार (5 मिली/किलो) या खड़ी फसल में 250-500 मिली प्रति एकड़ (पानी में मिलाकर) की दर से स्प्रे किया जा सकता है। धान की सीधी बुआई हेतु नैनो डीएपी (8ः16) की 200 मि.ली. मात्रा को 3 लीटर पानी में घोलकर 30 कि.ग्रा. धान के बीज को उपचारित कर छायादार स्थान में आधे घण्टे हवा में सुखाकर प्रयोग करें अथवा रोपाई विधि हेतु नैनो डीएपी (8ः16) की 200 मि.ली. मात्रा को 40 लीटर पानी में घोलकर धान की रोपाई पूर्व 30 मिनट तक जड़ उपचार करें। धान की बोवाई अथवा रोपाई के 25-30 दिनों पश्चात् प्रति एकड़ नैनो डीएपी की 300 मि. ली. मात्रा को 125-150 लीटर पानी में घोलकर खड़ी फसल में पर्णीय छिड़काव किया जाना चाहिए।



