Home छत्तीसगढ़ आम आदमी पार्टी का जांच दल इरपागुटटा पहुंच पीड़ित परिवार से मिला...

आम आदमी पार्टी का जांच दल इरपागुटटा पहुंच पीड़ित परिवार से मिला न्यायिक जांच की मांग उठी

0

 

 

Ro.No - 13759/40

 

 

बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – आम आदमी पार्टी ने की प्रेस नोट जारी करते कहा कि जिले के इरपागुट्टा गांव में हाल ही में एक कथित फर्जी मुठभेड़ में मारे गए आदिवासी किसान महेश कुड़ियाम के परिवार से मिलने आम आदमी पार्टी का जांच दल 28 जून 2025 को गांव पहुंचा। जांच दल में पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष व अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला के नेतृत्व में कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल रहे। गांव पहुंचकर उन्होंने महेश की पत्नी सुमित्रा कुड़ियाम, उनके सात बच्चों और स्थानीय ग्रामीणों से मुलाकात की तथा इस घटना से जुड़ी पूरी जानकारी और तथ्य जुटाए।

 

परिवार की ओर से बताया गया कि 6 जून 2025 को महेश अपने भैसे को ढूंढने पास के जंगल की ओर गया था, लेकिन वापस नहीं लौटा। अगले दिन गांववालों ने खोजबीन की, उसी दौरान एक युवक ने बताया कि उसने किसी व्यक्ति को पुलिस के कब्जे में हाथ बंधे हुए देखा था। जब 8 जून को गांववाले बीजापुर थाने पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें एक तस्वीर दिखाई, जिसमें शव की पहचान महेश के रूप में हुई। पुलिस ने उसे एक लाख का इनामी माओवादी बताते हुए एनकाउंटर में मारे जाने की बात कही और शव परिवार को सौंप दिया।

 

जांच दल ने गांववालों, स्कूल के शिक्षकों और अन्य लोगों से बातचीत की, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि महेश एक शांत, मेहनती और ईमानदार ग्रामीण किसान था, जो पिछले दो वर्षों से स्थानीय स्कूल में रसोइया का काम कर रहा था। उसकी छवि एक जिम्मेदार नागरिक की थी और किसी भी प्रकार की नक्सली गतिविधियों से उसका कोई लेना-देना नहीं था। उसके पास आधार कार्ड, राशन कार्ड, बैंक खाता सहित सभी वैध दस्तावेज़ मौजूद हैं, और उसके खाते में नियमित वेतन आता रहा है। उसके सात बच्चे हैं, जिनमें सबसे बड़ा लगभग 12 वर्ष का और सबसे छोटा सिर्फ 6 माह का है।

 

इस घटना को लेकर जांच समिति की अध्यक्ष अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला ने कहा कि प्रारंभिक तौर पर यह स्पष्ट होता है कि महेश की हत्या एक फर्जी मुठभेड़ में की गई है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि मामले की न्यायिक जांच कराई जाए, ताकि दोषियों को सजा मिल सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके। साथ ही उन्होंने महेश की पत्नी को सरकारी नौकरी देने, परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने और बच्चों की पढ़ाई-परवरिश की जिम्मेदारी सरकार द्वारा उठाने की मांग की।

 

प्रियंका शुक्ला ने कहा कि यह वही इलाका है जहां पहले सारकेगुड़ा और एड्समेटा जैसी घटनाएं हुई थीं, जिन्हें न्यायिक जांच में फर्जी मुठभेड़ घोषित किया गया। उन्होंने कहा कि उन घटनाओं से सबक लेते हुए वर्तमान सरकार को इस मामले में भी संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए।

 

जांच दल ने बीजापुर के पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर से मिलने की कोशिश की और पुलिस अधीक्षक के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा। जांच टीम में प्रियंका शुक्ला के साथ बल्लू भवानी, समीर खान, मिथिलेश बघेल, नरेंद्र नाग, अनिल दुर्गम, सतीश मंडावी, राकेश कश्यप और संदीप गोटा भी शामिल थे।

 

जांच दल ने साफ कहा है कि सरकार को आदिवासी समाज की आवाज को दबाने की बजाय, उनके साथ न्याय करना चाहिए और जल, जंगल, जमीन की रक्षा करते हुए आदिवासियों के पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here