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एनजीटी का बड़ा फैसला:सरकार से मांगी रिपोर्ट,छत्‍तीसगढ़ के जलाशयों पर जाने क्‍या है मामला

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Big decision of NGT: Report sought from government, know what is the matter on the reservoirs of Chhattisgarh

रायपुर। छत्‍तीसगढ़ के हजारों तालाब कभी इसकी पहचान हुआ करते थे। गांव से लेकर शहर तक हर जगह दर्जनों की संख्‍या में तालाब हुआ करते थे, लेकिन शहरीकरण और बढ़ती आबादी की वजह से धीरे-धीरे तालाब खत्‍म होते जा रहे हैं। जो बचे हैं उनकी स्थिति भी ठीक नहीं है। ज्‍यादातर अतिक्रमण और प्रदूषण का शिकार हो रहे हैं। तालाबों के संरक्षण के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं बावजूद इसके तालाबों का दायरा कम होता जा रहा है। ऐसे में नेशनल ग्रीन ट्रिब्‍यूनल (एनजीटी) ने राज्‍य की तालाबों की स्थिति को लेकर सरकार से रिपोर्ट तलब की है।

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एनजीटी की भोपाल बेंच ने एक मामले की सुनवाई करते हुए राज्‍य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। एनजीटी ने राज्‍य के शहरी विकास, ग्रामीण विकास और जल संसाधन विभाग के सचिव के साथ ही राज्‍य के प्रर्यावरण संरक्षण मंडल के सचिव को पत्र जारी कर राज्‍य में तालबों की स्थिति पर पूरी रिपोर्ट मांगी है। एनजीटी ने 10 अप्रैल 2024 को जारी इस नोटिस में सरकार ने छह सप्‍ताह के भीतर पूरी जानकारी देने का निर्देश दिया है।

एनजीटी ने मांगी है यह जानकारी

एनजीटी ने सरकार से राज्य में तालाबों और जल निकायों की कुल संख्या का संकलन करें का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि राज्‍य के सभी जिलाधिकारियों से राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज तालाबों और क्षेत्रों, वर्तमान स्थिति, अतिक्रमण और आगे की कार्रवाई के संबंध में स्थिति रिपोर्ट तलब करें। जिलाधिकारियों द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।

जाने क्‍या है मामला

दरअसल बलौदा जाजंगीर-चांपा जिला के रहने वाले जगदीश प्रसाद देवांगन ने राज्‍य में तालाबों की स्थिति को लेकर एनजीटी में एक याचिका दाखिल की है। इसमें देवांगन ने बलौदा के कुछ तालाबों की स्थिति की जानकारी देते हुए तालाबों पर अतिक्रमण और संरक्षण नहीं होने की शिकायत की है। उन्‍होंने सिवरेज का पानी तालाबों में सीधे डाले जाने की भी शिकायत की है। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने सरकार से रिपोर्ट तलब की है।

एनजीटी ने 63 पेज के आदेश में ये दिए हैं निर्देश

मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तालाब में गंदा पानी मिलने से रोके।
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए 31 मार्च 2021 तक का अल्टीमेटम।
कलेक्टर व अन्य अधिकारियों को तालाब जमीन की नपती कराने को कहा।
कलेक्टर को आदेश दिए कि तालाब की जमीन पर अवैध भराव, गंदगी हटवाएं।
मप्र शासन के चीफ सेक्रेटरी को कहा कि तालाब में किसी तरह का अतिक्रमण ना हो।
गंदा पानी समय सीमा में नहीं रुका तो जिम्मेदार विभागों से प्रति ड्रेनेज प्रति माह पांच लाख का जुर्माना वसूला जाए।
एफटीएल व एमडब्ल्यूएल में किसी भी तरह का निर्माण नहीं होना चाहिए।
किसी भी स्थिति में व किसी भी तरह से तालाब का डूब क्षेत्र कम ना हो, इसके लिए नपा व कलेक्टर को सख्त आदेश दिए।

25 बीघा तालाब पर कॉलोनियां

तेलिया तालाब का जलभराव क्षेत्र कुल 634 बीघा है।

इसमें पूर्व में ही 25 बीघा पर कॉलोनियां बनी चुकी हैं।

25 बीघा जमीन पर यशनगर का कुछ भाग व केशवकुंज कॉलोनियां हैं।

6 जून को तत्कालीन कलेक्टर स्वतंत्रकुमार सिंह ने लगभग 300 बीघा जमीन को डूब

से बाहर करते हुए रसूखदारों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया।

अब एनजीटी ने कलेक्टर के उस आदेश को शून्य करते हुए संरक्षण के आदेश दिए।

सख्त आदेश की उम्मीद

तालाब में अतिक्रमण के मामलों में पूर्व में आदेश क्रमांक 6932/20111 में जबलपुर तालाब की जमीन, अादेश क्रमांक 1132/2011 एवं 4787/2001 में तालाब की जमीन संरक्षण के आदेश दिए हैं। इन आदेशाें में उच्च न्यायालय ने कहा है कि तालाब का मूल रकबा घटाया नहीं जा सकता। यदि किसी निजी भूमि स्वामी की भूमि तालाब में आती है तब भी वह सदैव तालाब ही रहेगा।

इस प्रकार भूमि स्वामियों द्वारा मिट्‌टी भरकर अपनी जमीन को एमडब्ल्यूएल से ऊपर उठा लिए जाने को मान्य नहीं दी जा सकती है क्योंकि एकसा करने का तात्पर्य यह तालाब का क्षेत्रफल निरंतर कम होता जाएगा। इन्हीं आदेश पर तत्कालीन कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव ने पूर्व कलेक्टर के आदेश पर स्टे दिया था। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले में भी तालाब संरक्षण के आदेश होने की संभावना जताई जा रही है। समय सीमा में कार्रवाई की जाएगी


 

 

 

 

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