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नवरात्र पर्व शुरू, आज से मां दुर्गा के नौ रूपों की होगी आराधना नरहरपुर अंतर्गत ग्राम जामगांव में

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Navratri festival begins, nine forms of Maa Durga will be worshipped from today in village Jamgaon under Narharpur.

सोमवार से शारदीय नवरात्र शुरू हो रहे हैं। हर्ष और उल्लास के साथ मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अर्चना और अनुष्ठान के साथ आराधना की जाएगी। हिंदू धर्म में प्रमुख त्यहारों में से एक नवरात्रि आज से आरम्भ हो रहा है आज से जिलेभर के लोग माता के नौ रूपों की आराधना में लग जाएंगे। नवरात्रि का अभिप्राय नौ, रातों का त्योहार है।

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जिसमें लोग आध्यात्मिक साधना, उपवास, भक्ति और शक्ति की उपासना करते हैं। जबकि ऐसी मान्यता है कि इन नौ दिनों में देवी दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया था और धर्म की रक्षा की थी। नवरात्रि में माता के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है।

जिनमें लोग माता के नौ रूपों क्रमशः शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री की आराधना पूरी श्रद्धा से करते हैं। जिनमें शारदीय नवरात्रि सबसे प्रमुख और व्यापक रूप से मनाई जाती है।

शैलपुत्री देवी दुर्गा का प्रथम रूप हैं और नवरात्रि के पहले दिन उनकी पूजा की जाती है। उनका नाम दो शब्दों से मिलकर बना है, “शैल” जिसका अर्थ है पर्वत तथा “पुत्री” अर्थात पुत्री या बेटी। अतः पर्वतराज हिमालय की पुत्री। यही देवी को माता पार्वती का अवतार माना जाता है, जिन्हें पहले जन्म में सती कहा जाता था और जिन्होंने अग्नि में स्वयं को समर्पित किया था।

अगले जन्म में वह हिमालय की पुत्री बनकर शैलपुत्री के रूप में अवतरित हुईं। माता का वाहन नंदी बैल है। साथ ही इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल एवं बाएँ हाथ में कमल का फूल रहता है। साथ ही माता सफेद वस्त्रों में सुशोभित होती हैं और शांत मुद्रा में विराजमान रहती हैं।

अलीगंज महावीर मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मनमोहन ठाकुर ने बताया कि, कई मायने में माता की आराधना के महवत्व बताये गए हैं। नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री की पूजा से साधक की यात्रा आध्यात्मिक रूप से शुरू होती है।

यह पूजा मूलाधार चक्र को जाग्रत करने में सहायक माना गया है, जिससे साधक की चेतना ऊपर उठती है। साथ ही इनके पूजा को शक्ति, शुद्धता, और दृढ़ता का प्रतीक माना गया है। इस पूजा के बीज मंत्र हैं- ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।

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