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नहर मरम्मत में गड़बड़ी पर घमासान,15 दिन में फटी ढलाई, पहली बरसात में बहा मटेरियल – जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

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मुंगेली/लोरमी।= लोरमी क्षेत्र में जल संसाधन विभाग द्वारा कराए जा रहे नहर मरम्मत और टीचिंग कार्य को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम पंचायत सरईपतेरा से घोरबंधा तक D-3 नहर में चल रहे निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों और स्थानीय नेताओं ने भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। लाखों रुपये की लागत से किए जा रहे इस कार्य में गुणवत्ता के मानकों की खुलेआम अनदेखी किए जाने का आरोप लग रहा है, जिसके चलते निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि नहर की टीचिंग और मरम्मत कार्य केवल खानापूर्ति बनकर रह गया है। आरोप है कि नहर की ढलाई में महज लगभग 1 इंच मोटाई की कंक्रीट डाली जा रही है, जबकि तकनीकी मानकों के अनुसार इससे कहीं अधिक मोटाई आवश्यक होती है। इसके अलावा निर्माण कार्य में काले पन्नी और गंदे पानी के उपयोग की भी बात सामने आ रही है, जिससे पूरे कार्य की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार नहर की ढलाई महज 15 दिनों के भीतर ही कई जगहों से फटने लगी है। हाल ही में हुई पहली बरसात में ही नहर की टीचिंग का मटेरियल बहने लगा, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता की पोल खुल गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी तरह घटिया निर्माण कार्य किया गया तो आने वाले समय में पूरी नहर क्षतिग्रस्त हो सकती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
किसानों ने एक और गंभीर समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। कई स्थानों पर खेतों की ऊंचाई नहर से अधिक बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब नहर का पानी खेतों से नीचे रहेगा तो सिंचाई का पानी खेतों तक कैसे पहुंचेगा। इस स्थिति को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखी जा रही है और वे इसे योजना की गंभीर खामी बता रहे हैं।
इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस नेता लखन कश्यप ने जल संसाधन विभाग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि नहर में न तो सही तरीके से कंक्रीट की तराई (क्योरिंग) की जा रही है और न ही निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों का पालन किया जा रहा है। उनका कहना है कि “नहर की ढलाई 15 दिन में ही फट गई और एक बरसात में ही मटेरियल बह गया। इससे साफ है कि पूरा काम बेहद घटिया तरीके से किया गया है और इसमें गंभीर लापरवाही बरती गई है।”
लखन कश्यप ने यह भी आरोप लगाया कि नहर में जो कार्य बचा हुआ है, उसमें दोबारा पीचिंग करवाई जा रही है, लेकिन उसमें भी गुणवत्ता का अभाव साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जल संसाधन विभाग उपसंभाग लोरमी के एसडीओ एस.एल. गेंदले अपनी ऊंची पहुंच और वरिष्ठ अधिकारियों से करीबी संबंधों का हवाला देकर ठेकेदार को संरक्षण दे रहे हैं, जिसके कारण ठेकेदार खुलेआम गुणवत्ता विहीन कार्य कर रहा है और उसे किसी प्रकार का प्रशासनिक या शासकीय डर नहीं है।
उन्होंने शासन और प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच नहीं कराई गई तो सरकारी धन की खुली बर्बादी के साथ-साथ किसानों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने मांग की है कि नहर निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराकर दोषी अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि नहर का निर्माण किसानों की सिंचाई सुविधा के लिए किया जा रहा है, लेकिन यदि निर्माण कार्य इसी तरह लापरवाही और भ्रष्टाचार के साथ किया जाता रहा तो इसका लाभ किसानों तक कभी नहीं पहुंच पाएगा। अब क्षेत्र के लोग शासन और प्रशासन से उम्मीद कर रहे हैं कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी और नहर निर्माण कार्य को गुणवत्ता के साथ पूरा कराया जाएगा।
अधिकारी का पक्ष नहीं मिला
इस पूरे मामले में जल संसाधन विभाग उपसंभाग लोरमी के अनुविभागीय अधिकारी (SDO) एस.एल. गेंदले से उनका पक्ष जानने के लिए फोन के माध्यम से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कॉल किए जाने के बावजूद उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके अलावा उनसे मिलने के लिए उनके कार्यालय भी दो-तीन दिनों तक गये लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो सकी।

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