सरसीवा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने के पावन अवसर पर संघ शताब्दी वर्ष के अंतर्गत सारंगढ़ की पवित्र धरती, गुरु घासीदास जी के ज्ञान स्थल पुष्पवाटिका में एक भव्य एवं प्रेरणादायी प्रमुख जन गोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन राष्ट्रभाव, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरण का एक सशक्त प्रतीक बनकर सामने आया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय रामनामी समाज के अध्यक्ष सेतबाई की गरिमामयी उपस्थिति रही, वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ चालक एफ.आर. निराला द्वारा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह प्रांत प्रचारक नारायण नामदेव ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में माँ भारती की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि यह हमारी मातृभूमि, हमारी श्रद्धा और हमारी पहचान है। उन्होंने कहा कि संघ का प्रत्येक स्वयंसेवक माँ भारती की सेवा को अपना सर्वोच्च कर्तव्य मानते हुए राष्ट्र के प्रति समर्पित भाव से कार्य करता है।
श्री नामदेव ने आगे गुरु घासीदास जी के जीवन और उनके विचारों का उल्लेख करते हुए बताया कि गुरु घासीदास जी ने “सत्य” और “समरसता” का जो संदेश समाज को दिया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास जी का जीवन हमें भेदभाव मिटाकर एक समरस समाज के निर्माण की प्रेरणा देता है, जो कि संघ के मूल विचारों के साथ पूरी तरह सामंजस्य रखता है।
उन्होंने संघ की सौ वर्षों की गौरवशाली यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ ने सदैव समाज को संगठित कर राष्ट्र को सशक्त बनाने का कार्य किया है। आज आवश्यकता है कि हम सभी समाज के विभिन्न वर्गों के बीच समन्वय स्थापित कर, राष्ट्रहित में मिलकर कार्य करें।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी वर्ग एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। पूरा वातावरण “भारत माता की जय” के उद्घोष से गूंज उठा और राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत-प्रोत दिखाई दिया।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने माँ भारती की सेवा और समाज में समरसता स्थापित करने का संकल्प लिया। और वन्दे मातरम् गीत के साथ समापन हुआ



