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जिसने भी इस संसार में जन्म लिया उसकी मृत्यु निशित है,,श्री श्री धराचार्य

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Ro.No - 13672/156

*प्रमोद अवस्थी मस्तूरी*

मस्तूरी। नवयुवकदुर्गोत्सव एवं दशहरा समिति दुर्गा चौक मस्तूरी के तत्वाधान में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिवस पर रैतापार कबीर धाम के पण्डित श्री श्री धरा चार्य जी ने अपने संगीत मय मधुर वाणी से भगवान शिव के भक्तो को भस्मा सूर की कथा सुनाते हुए कहा की एक बार की बात है भस्मासुर नामक एक राक्षस को संपूर्ण विश्व पर राज करने की इच्छा हुई ।तब वह सोचने लगा कि संपूर्ण जगत पर राज करने के लिए तो उसे देवताओं के समान अमर होना चाहिए और अगर उसे अमर होना है तो उसे भगवान शिव की तपस्या करनी चाहिए क्योंकि भगवान शिव सबसे जल्दी अपने भक्तों पर प्रसन्न होते है। भस्मासुर ने भगवान शिव की कठिन तपस्या शुरू कर दी । अपने अंगो को काट काट कर अर्पित कर रहे थे तब भगवान शिव भस्मासुर की तपस्या से खुश हुए और भस्मासुर को दर्शन दिया और कहा कि उसे जो चाहिए वह मांग सकता है।

 

भस्मासुर बहुत प्रसन्न होकर बोला- ‘हे प्रभु! आप तो अंतर्यामी है , आपको तो पता है कि मैं संपूर्ण जगत पर राज करना चाहता हूं इसलिए मुझे अमर होने का वरदान प्रदान करे। भगवान शिव ने कहा – ‘हे वत्स! मैं तुम्हारी तपस्या से प्रसन्न हूं पर यह वरदान मैं नहीं दे सकता । क्योंकि यह संसार के नियमों के विरूद्ध है , जिसने इस संसार में जन्म लिया है उसका मरना निश्चित है।

 

भस्मासुर फिर भी अपनी बात पर अडिग रहा पर जब उसने देखा कि भगवान शिव इस बात के लिए राजी नहीं हो रहे तो उसने कहा कि -प्रभु आप मुझे ऐसा वरदान दे कि मैं जिसके माथे पर अपना हाथ रखुंगा वह जलकर भस्म हो जाएगा। ….. भगवान शिव ने कहा- ऐसा ही होगा।

 

अब जब भस्मासुर को वरदान प्राप्त हो गया तो उसने सोचा क्यों न एक बार वरदान की सत्यता जांच की जाए। तब उसने भगवान शिव के माथे पर हाथ रखने की सोची। भगवान शिव उसकी मंशा समझ गए और वहां से अंतर्ध्यान हो गया।

 

 

पर भस्मासुर तो उनके पीछे पड़ गया । तब भगवान शिव को भगवान विष्णु का ध्यान आया । भगवान विष्णु भगवान शिव की समस्या समझ गए और भस्मासुर से भगवान शिव की रक्षा के लिए मोहिनी रूप धारण किया। मोहिनी रूप धारण कर भगवान विष्णु भस्मासुर के सामने आए। भस्मासुर ने जब मोहिनी को देखा तो वह उसपर मोहित हो गया और भगवान शिव का वरदान उसे याद नहीं रहा । उसने मोहिनी से कहा -हे सुंदरी। तुम्हारा नाम क्या है? मैं तुम्हारे रूप पर मोहित हो गया हूं क्या तुम मुझसे विवाह करोगी?

 

तब मोहिनी ने कहा कि – ‘मैं एक नृत्यांगना हूं और मैं शादी भी उसी से करूंगी जो नृत्य कला में निपुण होगा।’ अब भस्मासुर क्या करता उसने तो कभी नृत्य नहीं किया था । तब वह बोला- ‘ हे सुंदरी, मैंने तो कभी नृत्य नही किया है पर अगर तुम मुझे नृत्य सिखाओ तो मैं सिख सकता हूँ ।’ तब मोहिनी बोली कि मैं जैसे-जैसे करूंगी तुम भी वैसे ही करना। भस्मासुर को नृत्य सिखाते समय मोहिनी ने अपना हाथ अपने माथे पर रखा उसे देखकर भस्मासुर ने भी अपना हाथ अपने माथे पर रख दिया और जलकर भस्म हो गया।

उसके पंडित जी ने भगवान दक्ष सती मां पार्वती की कथा सुनाएं।

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