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अनुसूचित जनजाति अनुसूचित जाति का ‘भारत बंद’: आरक्षण और न्याय की मांग

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‘Bharat Bandh’ of Scheduled Tribes and Scheduled Castes: Demand for reservation and justice

नारायणपुर :- अनुसूचित जनजाति अनुसूचित जाति के द्वारा बुधवार को आयोजित ‘भारत बंद’ ने देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक प्रभाव डाला। यह अनुसूचित जनजाति अनुसूचित जाति और ओबीसी समुदायों के लिए मजबूत प्रतिनिधित्व, सुरक्षा और न्याय की मांगों को लेकर बुलाया गया।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की सात न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिए गए फैसले से असहमति जताते हुए संगठन ने इस फैसले को ऐतिहासिक इंदिरा साहनी मामले में नौ न्यायाधीशों की पीठ के फैसले को कमजोर करने वाला बताया। इस फैसले ने भारत में आरक्षण की रूपरेखा तय की थी।

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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में बंद का व्यापक असर देखा गया। सर्व आदिवासी समाज ने सुबह से रैली निकालकर व्यावसायिक प्रतिष्ठान एवं आम जनता से समर्थन की अपील की।

नारायणपुर के गढ़बेंगाल चौक में सर्व समाज के लोगो ने चक्काजाम किया इस दौरान केवल एमरजेंसी सेवाए चालू थी। जिसके बाद बखरूपारा बाजार स्थल में सभा का आयोजन हुआ जिसमें वक्ताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1 अगस्त को दिए गए फैसले अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के कोटे के अंदर कोटा और कोट के अंदर क्रीमी लेयर निर्धारित करने का अधिकार राज्यों को देने निर्णय पारित किया है, इस निर्णय से देश भर के अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति वर्ग प्रभावित हो रहे हैं। वास्तव में अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति वर्ग के भीतर वर्गीकरण करने का अधिकार राज्यों को नहीं है, क्योंकि आर्टिकल 341 (2) एवं 342 (2) यह अधिकार देश के सांसद को देता है और यही बात ई वी चिनैया मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने 2005 में कहा था। पंजाब राज्य बनाम दविंदर सिंह मामले में 1 अगस्त 2024 के निर्णय में 7 जजों में से एक जज जस्टिस बेला एम त्रिवेदी जी ने 6 जजों के फैसले से असहमति जताते हुए अपना निर्णय उपवर्गीकरण और क्रीमीलेयर के खिलाफ दी है। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी ने 9 जजों की संवैधानिक पीठ इंदिरा साहनी मामले 1992 में जस्टिस जीवन रेड्डी के कथन को उद्धृत करते हुए निर्णय लिखी है कि क्रीमी लेयर टेस्ट केवल पिछड़े वर्ग तक सीमित है, अनुसूचित जातियों एवम् जनजातियों के मामले में इसकी कोई प्रासंगिकता नहीं है।

सभा बाद राष्ट्रपति, चीफ जस्टिस आफ इंडिया सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली, प्रधानमंत्री भारत सरकार नई दिल्ली, कानून मंत्री भारत सरकार, राज्यपालछत्तीसगढ़. शासन रायपुर,अध्यक्ष राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, नई दिल्ली, अध्यक्ष राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, नई दिल्ली के नाम ज्ञापन सौंपा गया। बंद के दौरान विभिन्न स्थानों पर रैलियां और विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा की दृष्टि से भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।

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