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नार्र हिचाड़ (चिचाड़ी) में गायता जोहारनी मिलन समारोह कार्यक्रम बड़े हर्षोल्लास से मनाया गया

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Gayta Joharni Milan Samaroh program was celebrated with great enthusiasm in Narr Hichad (Chichadi)

प्रकृति के गोद में बसा बस्तर संभाग में भादो माह की नवमी तिथि में प्रत्येक गांव-गांव में पुनांग तिन्दना पंडुम एवं गायता जोहारनी मनाने के बाद कई गांव पारा (जैसे- चिचाड़ी बड़ेपारा, सोड़ापारा, गुड्डरीपारा, डुरकीपारा) साथ मिलकर एक वृहद स्तर पर दिनांक 17.09.24 दिन- मंगलवार को गायता जोहारनी मिलन समारोह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें गांव के अतिरिक्त आस-पास के लगे गांवों के लोगों को भी आमंत्रित किया गया था और गांव के गायता, पटेल, पुजारी, सिरहा, गुनिया, कोटवार, प्रमुख सियान- सियानिनों, आमंत्रित मेहमानों एवं ग्राम के समस्त ग्रामवासियों को जिम्मीदारिन गुड्ड में सेवा अर्जी पश्चात मांदरी नृत्य, गाजे बाजे के साथ परघाते हुए कार्यक्रम स्थल पर ले जाया गया। कार्यक्रम स्थल पर स्थापित नार्र भुमियार माजी मुदिया का प्रतीक चिन्ह टंगिया एवं बुढ़ालपेन की सेवा अर्जी किया गया और सभी अतिथियों को मंच में ससम्मान बैठाया गया, तत्पश्चात गायता, पटेल, पुजारी एवं सभी प्रमुख सियानों को चावल टिका एवं पगड़ी बांधकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सगाजनों को पालोड़ आकी (कोरई पत्ता) में चिवड़ा वितरण किया गया।

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सभी वक्ताओं के द्वारा गोंडी, छत्तीसगढ़ी एवं हिन्दी में नवा खानी एवं गायता जोहारनी पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला गया। नार्र हुजाड़ के अनुसार गांव में गोंड मुरिया,.. आदिवासियों के अतिरिक्त जितने भी मूलनिवासी समुदाय- राउत, गांडा, लोहार,…. निवासरत हैं वे सभी लोग भी भादो माह के नवमी तिथि को नवा खानी पर्व बड़े हर्षोल्लास से एक साथ मनाते हैं। नवा खानी में सभी समुदाय अपने- अपने पुर्वजों, पुरखों अर्थात दादा के दादा के….दादा या अपने कुल के बुढ़ा को मड़दी आकी (साजा पत्ता) में नया अन्न को अर्पित किया जाता है तब जाकर परिवार के सभी सदस्य (पालोड़ आकी) कोरई पत्ता में नया अन्न ग्रहण करते हैं यह परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है। जिस किसी के पास नवा खाने के लिए चावल नहीं होने पर उसके लिए धान-चावल की व्यवस्था किया जाता था। इस तरह गांव के सभी लोग प्रकृति पर्व नवा खानी को बड़े हर्षोल्लास से मनाते हैं और गांव के सभी लोग आपसी भाई-चारा से रहते हैं।

नवा खानी के दूसरे दिन को बासी तिहार के नाम से भी जाना जाता है इसके अतिरिक्त यह दिन गायता जोहारनी के नाम से प्रसिद्ध है। गायता जोहारनी में गांव के गायता को सभी लोग नवा खानी की बधाई देने एवं जोहार भेंट करने जाते हैं। ऐसा ही गांव खुशहाल रहे, ऐसा ही गांव के पेनों से मन्नत मांगते हैं। गांव में बासी के दिन एक दूसरे के घर जाकर नवा खानी की बधाई… एवं जोहार भेंट करने जाते हैं, एक दूसरे का हालचाल शेयर करते हैं… इस तरह से नवा खानी एवं गायता जोहारनी दो दिनों तक पर्व चलता है।

गोंडवाना समाज समन्वय समिति बस्तर संभाग की पहल पर विश्व की महान संस्कृति को प्रचार प्रसार, सामाजिक रूप से मजबूत करने, प्रत्येक व्यक्ति तक जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से हर गांव, क्षेत्र, ब्लॉक, जिला एवं संभाग स्तर का गायता जोहारनी मिलन समारोह कार्यक्रम शुरूआत किया गया है। ऐसे कार्यक्रमों से नवा खानी एवं गायता जोहारनी की जानकारी हर व्यक्ति को मिलेगा और अपने भाषा, संस्कृति, रूढ़ि प्रथा एवं अपने- अपने पुरखों से जुड़ेगा एवं महान संस्कृति पर गौरवान्वित महसूस करेगा। गुट्टा मांदरी नृत्य- मांझापारा मांझीआठगांव, माटी मांदरी नृत्य- नवागढ़ आकर्षण का केंद्र रहा, सभी ने भंडारवंडी टीम के पारंपरिक वाद्ययंत्रों का भरपूर आनंद लेकर सामूहिक रेला पाटा नृत्य किया गया।

गायता जोहारनी मिलन समारोह कार्यक्रम में गायता एवं पटेल के परिवार, पुजारी रामलाल मरकाम, समरथ वट्टी, हीरासिंग मरकाम, सोनऊ मरकाम, घनश्याम मरकाम, नरसू नेताम (सरपंच), सुखलाल मरकाम (जनपद सदस्य), चमरू वट्टी, जगन्नाथ मरकाम, राजेश मरकाम, दया राम नेताम, कन्ही नेताम, लखमू नेताम, लच्छमन नेताम, नाथू नेताम, सुंदर नेताम, अर्जुन नेताम, सुकदास मरकाम, सोमा (भादू) मरकाम, लच्छमा यादव, दुलार सिंह यादव, धनसिंह यादव, समस्त ग्रामवासी- पितृत्व, मातृत्व शक्ति, लयाह- लयोर एवं आस- पास से आए हमारे सगाजन हजारों की संख्या में उपस्थित थे। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सियानों के मार्गदर्शन पर ग्राम के जागरूक युवा-युवतियों का विशेष योगदान रहा है। अंत में सभी का आभार व्यक्त किया गया। मंच का संचालन रामप्रसाद नेताम एवं युवराज नेताम ने समां बांधते हुए बेहतरीन तरीके से निर्वहन किये।

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