Maa Samleshwari temple of Gatadih is a symbol of faith
प्रहलाद साहू / किरण दूत
सरसीवां – सरसीवां से सरायपाली रोड के मुख्य मार्ग में बसा गांव गाताडीह जहां मां सम्लेश्वरी मंदिर स्थापित है जहां मां सम्लेश्वरी की भव्य प्रतिमा और मंदिर है। मंदिर की आस्थाओं के बारे बताया जाता है क़ी गाताडीह गांव बुजुर्ग ग्रामीणों का कहना है कि बरसो से मां सम्लेश्वरी मंदिर झोपड़ी , कच्चे मकान में मां की मूर्ति को स्थापना किये थे। गांव वालों के सहयोग से भव्य मंदिर निर्माण किया गया। मंदिर में मां सम्लेश्वरी की प्रतिमा की स्थापना के बारे में गाताडीह के सरपंच प्रतिनिधि दिलावर सिंह सिदार ने मंदिर के बारे में बताया कि मेरा उम्र 42 वर्ष चल रहा है।मेरी जानकारी के अनुसार गांव के बुजुर्ग लोगों से चर्चा दौरान सुना हू कि बरसो पहले मां सम्लेश्वरी मंदिर मिट्टी के मकान में विराजमान थी। और लोग भक्ति भाव से मां की सेवा कर उपासना करते थे। जिसके बाद गांव वालों के आर्थिक सहयोग से मां सम्लेश्वरी मंदिर का निर्माण किया गया।फिर मां सम्लेश्वरी की प्रतिमा को मंदिर में स्थापना किया गया ऐसा इस मंदिर के बारे में गांव के बुजुर्ग लोगों द्वारा बताते हैं जिससे मैं सुना हूं।
जहां नवरात्रि के समय गांव वालों व भक्तो के द्वारा चढ़ाएं गये तेलों से मां सम्लेश्वरी मंदिर में ज्योति जलती है। सम्लेश्वरी मंदिर में रोजाना श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। इस मंदिर में भक्त कर नापते हुए आते हैं और मां से अपने घर परिवार के सुख शांति के लिए मन्नत मांगते हैं।
वहीं मां सम्लेश्वरी मंदिर के पुजारी रामसिंग नेताम ने बताया कि हमारे कई पीढ़ी द्वारा मां सम्लेश्वरी मंदिर का पूजा करते आ रहे हैं । पुजारी नेताम के पिता धरमसिग नेताम के पुत्र हैं। उनके पिता भी मां सम्लेश्वरी मंदिर में पुजारी थे।जिनका मृत्यु होंने के बाद रामसिंग नेताम द्वारा मंदिर में पुजारी के रूप में पूजा करते आ रहे हैं । आगे पुजारी ने बताया कि जिस दिन से गांव गाताडीह बसा है , उसके के बाद मां सम्लेश्वरी मंदिर का स्थापना हुआ है। जहां मां सम्लेश्वरी मंदिर में नवरात्रि के समय श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रहता है। सम्लेश्वरी मंदिर में मां विराजमान हैं और गांवों की रक्षा हमेशा करती है ऐसा गाँव वालों का कहना है। मां सम्लेश्वरी मंदिर के दर्शन मात्र से भक्तो का मनोकामना पूर्ण होता है।



