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कुपोषण कम करने वाले जिला में 6 महीने से पोषण आहार नहीं आंगनबाड़ी बच्चों को विभागीय उदासीनता

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नक्सल पीड़ित महिलाओं का रोजगार बन्द, रेडी टू ईट के भरोसे बच्चे

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बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – जिला मुख्यालय में कुछ दिन पूर्व प्रदेश के मुख्य और जिला प्रशासन की पहल पर पोस्टिक आहार से भरपूर चिकी फैक्ट्री का हुआ था उद्घाटन जो 7 महीना से बंद पडा हैं । वही 60 से 65 नक्सल पीड़ित परिवार को भी मिलता था रोजगार सबसे बड़ी बात कारखाने में लोगों को रोजगार तो मिलता ही था जिले के अलग-अलग आंगनबाड़ी केंद्रों में भी पौष्टिक आहार के रूप में नन्हे मुन्ने बच्चों को चिकी दिया जाता था । पिछले 7 से 8 महीना से फैक्ट्री बंद होने के कारण का तो खुलासा विभाग के द्वारा नहीं हो पा रहा वहीं बड़े दुर्भाग्य की बात की लगभग 20 लख रुपए पर डे काम करने वाली कंपनी इन दोनों बंद पड़ी है । 100 से भी ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता था इस फैक्ट्री से दो टन तकरीबन माल हर रोज बनाया जाता था । इस फैक्ट्री में वही महीने की 6 करोड़ की इनकम थी। इस फैक्ट्री की जिसमें नक्सल पीड़ित परिवार को भी लाभ मिल रहा था । वहीं दूसरी ओर प्रोटीन विटामिन से पूर्ण पौष्टिक आहार भी इसी फैक्ट्री से छत्तीसगढ़ से लेकर तेलंगाना तक पहुंचता था ।

मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत जिले में कुपोषण को दूर करने के लिए बीजापुर पिछले दिनों काफी अच्छा काम कर रहा था और महिला विकास विभाग के तहत अंदरूनी क्षेत्र में भी बच्चों को खाना किशोरी बालिकाओं के को खाना गर्भवती महिलाओं को खाना अल्युमिनियम युक्त बच्चों के लिए अच्छी व्यवस्था जैसे अन्य शासकीय योजनाओं का भी लाभ मिल रहा था । परन्तु पिछले 7 से 8 महीने में महिला बाल विकास विभाग अंदरूनी क्षेत्रों से पूरी तरह गायब हो चुका है पिछले दिनों हुए वजन त्यौहार के बाद डाटा नहीं होने की वजह से अब तक पता नहीं है कि पौष्टिक आहार में स्थिति कहां पहुंची है। बात करें तो मैदानी एरिया से अंदरूनी क्षेत्रों में काफी गंभीर स्थिति है बच्चों की कई ऐसे आंगनबाड़ी केंद्र है जहां रेडी टू इट पहुंचने से पहले ही वैलिडिटी खत्म हो जाती है राज्य शासन के द्वारा रेडी टू ईट की सप्लाई चल रही है जो इन दोनों बैल गाड़ियों में पहुंचने की स्थिति बनी हुई है ।

महिला बाल विकास अधिकारी प्रीति कोकर चकियार से जब इस संबंध में बात करने पहुंचे तो पता चला कि मैडम मीटिंग में है ।

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