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कलेक्टर गोयल ने कहा स्कूलों में परीक्षा परिणाम बेहतर करना शिक्षकों का दायित्व

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Collector Goyal said that it is the responsibility of teachers to improve the exam results in schools

कमजोर बच्चों के परीक्षा परिणाम सुधारने में शिक्षकों का हो फोकस-कलेक्टर कार्तिकेया गोयल

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कलेक्टर कार्तिकेया गोयल ने शिक्षा विभाग की बैठक लेकर अर्धवार्षिक परीक्षा परिणामों की गहन समीक्षा की

रायगढ़ / स्कूलों का परीक्षा परिणाम सुधारने कमजोर प्रदर्शन वाले बच्चों पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। खासकर दसवीं एवं बारहवीं के बच्चे जो इस साल बोर्ड की परीक्षा में बैठेंगे। सभी प्राचार्य एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि अद्र्धवार्षिक परीक्षा में जिन बच्चों के परिणाम अच्छे नहीं रहे है उन बच्चों पर अधिक मेहनत की जाए। ये बातें कलेक्टर कार्तिकेया गोयल ने आज शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में कही।

कलेक्टर कार्तिकेया गोयल आज शिक्षा विभाग की बैठक में अर्धवार्षिक परीक्षा के परिणामों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षकों एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों का लक्ष्य स्कूलों का उत्कृष्ट परिणाम होना चाहिए। उन्होंने परीक्षा परिणामों की समीक्षा के दौरान कमजोर प्रदर्शन वाले स्कूलों पर गहरी नाराजगी जतायी और ऐसे प्राचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही हिदायत देते हुए कहा कि आगे प्री-बोर्ड परीक्षाएं होनी है इसके लिए अभी से अपनी तैयारी शुरू करें, इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं चलेगी। जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर सभी बीईओ और संकुल समन्वयक सुनिश्चित करें कि स्कूलों में अध्यापन का कार्य अच्छे से हो। रायगढ़ जिला का परीक्षा परिणाम बीते सालों से बेहतर करना आप सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि लापरवाही करने वालों की जिम्मेदारी तय करते हुए कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

कलेक्टर गोयल ने कहा कि स्कूली जीवन किसी भी छात्र की जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण साल होते है। माता-पिता बच्चों को स्कूलों में सर्वांगीण विकास के लिए भेजते है। शिक्षक के रूप में छात्रों को अपने जिले के साथ पूरे देश के लिए एक सक्षम बुद्धिमता के मानव संसाधन के रूप में तैयार करना शिक्षकों का कर्तव्य है। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा कि स्कूलों में सुनिश्चित किया जाए कि स्कूलों में सभी शिक्षक समन्वय से काम करें। किसी भी स्कूल का परीक्षा परिणाम वहां के शिक्षकों का सामुहिक उत्तरदायित्व होता है। ग्रामीण इलाकों में बच्चों के अनुपस्थिति के बाते भी आती रहती है। ऐसे पालकों से संपर्क कर शिक्षक बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करें। आवश्यकता पडऩे पर शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों का भी सहयोग लें। कलेक्टर श्री गोयल ने भाषा के साथ-साथ गणित व विज्ञान विषय पर विशेष रूप से ध्यान देने के निर्देश दिए। बच्चों को बोर्ड परीक्षा के अभ्यास के लिए सिलेबस कम्पलीट कराते हुए पिछले सालों के प्रश्न पत्र जरूर हल करवायें, आवश्कता पडऩे पर एक्सट्रा क्लासेस लें।

बैठक में सीईओ जिला पंचायत जितेन्द्र यादव, जिला शिक्षा अधिकारी डॉ.के.वी.राव, डीएमसी श्री नरेन्द्र कुमार चौधरी सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी व जिले के सभी हाई एवं हायर सेकेण्ड्री स्कूलों के प्राचार्य उपस्थित रहे।
रोज पढ़वायें अखबार, स्कूलों में अनिवार्य रूप से लगवाएं लाईब्रेरी पीरियड

कलेक्टर गोयल ने कहा कि सभी स्कूलों में छात्रों को रोज अखबार पढ़वायें। अखबार के संपादकीय पृष्ट को विशेष रूप से प्रार्थना असेम्बली में छात्रों को पढऩेे के लिए कहे। इससे देश-दुनिया में चल रहे सम-सामयिक विषयों पर उनकी पकड़ मजबूत होगी और स्टेज से बोलने का भय दूर होगा। इसके साथ ही उन्होंने स्कूलों में लाईब्रेरी का पीरियड अनिवार्य रूप से रखने जहां संभव हो वहां बुक क्लब बनाकर पुस्तक पाठन के लिए छात्रों को प्रेरित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर श्री गोयल ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने के लिए छात्रों के भीतर दो स्किल अनिवार्य रूप से होने चाहिए। पहला काम्प्रिहेंशन अर्थात किसी विषय वस्तु को पढ़कर कितनी जल्दी समझा जा सकता है, दूसरा अच्छा लेखन कौशल। छात्रों के भीतर यह स्किल स्कूल जीवन से ही विकसित किए जाने चाहिए। जिससे वे जल्द अपने लक्ष्यों को तय कर उसे पाने आगे बढ़ सके।

बच्चों का करियर गाईडेंस कर उन्हें सही दिशा में बढ़ाये आगे

कलेक्टर गोयल ने प्राचार्यों से कहा कि स्कूलों में कक्षा दसवीं के बाद बच्चों की रूचि व योग्यता के अनुसार उन्हें करियर निर्माण के लिए मार्गदर्शन देते हुए सही दिशा में आगे बढ़ाए। डॉक्टरी व इंजीनियरिंग के अलावा आज करियर के बहुत से विकल्प हमारे सामने है। जिन्हें चुनकर छात्र अपना उज्जवल भविष्य बना सकते है। इन फिल्ड से जुड़े प्रतियोगी परीक्षाओं व इंटे्रस एग्जाम, उसकी तैयारी के बारे में छात्रों को गाईड करें। आज ऑनलाईन वीडियो लेक्चर के माध्यम से पढ़ाई-लिखाई काफी आसान हो गई है, इसका सहयोग भी छात्रों की तैयारी में लिया जा सकता है।

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