Home Blog नियद नेल्ला नार योजना : खाता खुलवाना और पैसा निकालना हुआ आसान

नियद नेल्ला नार योजना : खाता खुलवाना और पैसा निकालना हुआ आसान

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Niyyad Nella Nar Scheme: Opening an account and withdrawing money has become easier

गाँवों में समूह की दीदियाँ पहुँचा रही बैंकिंग सुविधा

Ro.No - 13672/156

बैंक दूर होने से ग्रामीणों को होती थी परेशानी

रायपुर / नियद नेल्ला नार योजनांतर्गत सुकमा जिले के दूरस्थ गाँव जो मुख्य शहर से काफ़ी दूर स्थित होते हैं वहाँ बैंक सुविधाओं को पहुंचाना बहुत कठिन कार्य होता है। वर्तमान में शासकीय योजनाओं की राशि भी डीबीटीएल के माध्यम से सीधे हितग्राहियों के बैंक खाते में अंतरित की जाती है। ऐसे में ग्रामीणों को लेन देन के लिए बैंक तक जाना बहुत मुश्किल होता था। हितग्राहियों से बैंको की दूरी कम करने के लिए जिला पंचायत सुकमा के सीईओ श्रीमती नम्रता जैन के द्वारा अभिनव पहल किया गया है जिसमें एनआरएलएम बिहान के स्व-सहायता समूह की दीदियों के द्वारा बीसी सखी के रूप में गांव में शिविर लगाकर और घर-घर जाकर बैंकिंग सुविधा प्रदान किया जा रहा है। बीसी सखी के द्वारा ग्रामीणों के बैंक संबंधी सारा काम घर पहुंच उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे ग्रामीणों के बैंक तक आने जाने का समय और पैसा दोनों बच रहा है। अपने घर में ही बैंक सुविधा मिल जाने से ग्रामीण बहुत खुश हैं। बैंक सखियों को भी इस कार्य से आमदनी हो रही है जिससे उन्हें आत्मनिर्भरता की राह मिली है।

नेटवर्क की पहुंच से हुआ काम आसान

नियद नेल्ला नार योजनांतर्गत चिन्हांकित गाँवों में नेटवर्क लग जाने से बीसी सखी दीदीयों के द्वारा पैसे का लेन देन किया जा रहा है। आधार इनेबल मशीन की सहायता से हितग्राहियों को आवश्यकतानुसार उनके खाते से पैसे निकालकर भुगतान भी किया जा रहा है। बीसी सखी के द्वारा उनके गाँव में घर घर जाकर उनका जनधन खाता भी खोला जा रहा है।

’दिसम्बर में ग्रामीणों को 67 हज़ार का भुगतान’: घर पहुंच बैंकिंग सुविधा से ग्रामीण हुए खुश

नियद नेल्ला नार योजनांतर्गत गाँव सिलगेर, एलमागुण्डा, दुलेड़, परिया, दुब्बामरका और सामसट्टी में 6 बीसी सखियों भारती कोरसा, सुष्मिता माडकाम, पोड़ियाम कोइंदे, माडवी राजू, वंजाम जोगी और मीडियाम मनोज के द्वारा नक़द लेन देन संबंधी कार्य सहजता से किया जा रहा है। उनके द्वारा दिसंबर माह में कुल 106 हितग्राहियों को ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के माध्यम से लगभग 67 हज़ार रुपये का भुगतान किया गया। दूरस्थ गांवों में ग्रामीणों के द्वारा बैंकिंग सेवा के माध्यम से पैसा आहरण करना बहुत बड़ी उपलब्धि है। वे अपने खाते से 100, 200 तो कभी 500 रुपये का आहरण कर रहे हैं। घर पहुंच पैसा मिल जाने से ग्रामीण बहुत खुश हैं।

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