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नामांकन के बाद बदले समीकरण, 16 वार्डों में कांग्रेस, 8 में भाजपा को बागियों से चुनौती

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Equations changed after nomination, Congress in 16 wards, BJP challenged by rebels in 8 wards

नगर निगम चुनाव: भाजपा-कांग्रेस के लिए बागी बने सिरदर्द

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रायगढ़। नगर निगम चुनाव में इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है। भाजपा और कांग्रेस को न सिर्फ एक-दूसरे से बल्कि अपने ही बागी उम्मीदवारों से भी निपटना पड़ रहा है। नामांकन दाखिले की अंतिम तिथि बीतने के बाद यह तस्वीर उभरकर सामने आई है कि कांग्रेस को लगभग 16 वार्डों में और वहीं भाजपा को करीब 8 वार्डों में बागियों से सीधी चुनौती मिल सकती है।

बागियों ने बदले समीकरण, नाम वापसी की कोशिशें जारी

मंगलवार को नामांकन की अंतिम तिथि थी, जिसके बाद चुनावी मैदान की स्थिति लगभग साफ हो चुकी है। अब नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा कि कौन से प्रत्याशी मैदान में डटे रहेंगे। टिकट वितरण को लेकर इस बार दोनों प्रमुख पार्टियों को काफी माथापच्ची करनी पड़ी। जब तक उम्मीदवारों के नाम फाइनल किए गए, तब तक कई दावेदारों ने अपने दम पर नामांकन दाखिल कर दिया था। इससे टिकट से वंचित कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी गई और कई ने पार्टी लाइन से हटकर चुनाव लड़ने का मन बना लिया।

कांग्रेस को 16, भाजपा को 8 वार्डों में बागियों से टक्कर

नामांकन सूची के अनुसार, कांग्रेस को लगभग 16 वार्डों में बागी उम्मीदवारों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, भाजपा के लिए करीब 8 वार्डों में ऐसी ही स्थिति है। उदाहरण के तौर पर, वार्ड 29 से कांग्रेस ने सावित्री चौहान को टिकट दिया है, लेकिन कांग्रेस के ही दो अन्य कार्यकर्ता—कामिनी मुकेश गजभिए और सविता विजय टंडन—ने भी नामांकन दाखिल कर दिया है। भाजपा के लिए वार्ड 39 में स्थिति चुनौतीपूर्ण है, जहां पार्टी ने संगीता यादव को प्रत्याशी बनाया है, लेकिन विजय लक्ष्मी श्रीवास ने भी पर्चा भरकर मुकाबले को रोचक बना दिया है।

14 वार्डों में सीधी टक्कर, 24 और 36 सबसे प्रतिस्पर्धी

दोनों पार्टियां अपने बागी उम्मीदवारों को मनाने में जुटी हुई हैं, लेकिन 14 ऐसे वार्ड हैं जहां नाम वापसी की कोई संभावना नहीं है। इन वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होगा। इनमें वार्ड 5, 9, 12, 13, 14, 15, 17, 18, 22, 23, 37, 38, 45 और 48 शामिल हैं। वहीं, कुछ वार्डों में बहुकोणीय संघर्ष देखने को मिलेगा। खासतौर पर वार्ड 24 और 36 में सबसे ज्यादा 8-8 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिससे चुनाव और रोचक हो गया है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि नाम वापसी के बाद चुनावी तस्वीर कितनी साफ होती है और कौन से प्रत्याशी अंत तक मैदान में बने रहते हैं।

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