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नरकालो-बायसी मार्ग पर पुल निर्माण में देरी से जनता बेहाल , सालो बाद भी अधूरा पुल, भ्रष्टाचार या प्रशासनिक लापरवाही?

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People are suffering due to delay in construction of bridge on Narakalo-Baisi road, bridge is incomplete even after years, corruption or administrative negligence?

रायगढ़ | जिस कार्य को एक साल में पूरा होना था, वह चार साल बाद भी अधूरा पड़ा है। नरकालो-बायसी मार्ग पर मांड नदी पर बनने वाले पुल का निर्माण कार्य देरी का शिकार हो गया है। स्थानीय लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग और ठेकेदार चुप्पी साधे बैठे हैं।

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अब भी अधूरा पुल, कॉलम में जंग लगी छड़ें

मांड नदी पर बनने वाले इस पुल का निर्माण कार्य 294 मीटर लंबा और 11 स्पान का है। शासन ने इस परियोजना के लिए 23 फरवरी 2021 को 13.85 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी, जिसमें निर्माण कार्य की लागत 10.57 करोड़ रुपये तय की गई थी।

निर्माण कार्य का ठेका 14 जनवरी 2022 को दिया गया था और इसे 13 अप्रैल 2023 तक पूरा होना था। लेकिन दो साल बाद भी पुल अधूरा पड़ा है। पुल के कॉलम में लगी सरियों पर जंग लग चुका है, जिससे इसकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

जनता को हो रही भारी परेशानी, बारिश में बढ़ती है मुसीबत

स्थानीय लोग पुल निर्माण में देरी से काफी परेशान हैं। बरसात के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। लोगों को दूसरे मार्गों से लंबा सफर तय करना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण की लापरवाही की हदें पार हो चुकी हैं और अब वे प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

क्यों रुका निर्माण? ठेकेदार और विभाग के अपने-अपने तर्क

क्या कह रहे हैं कार्यपालन अभियंता?

रमेश कुमार वर्मा, कार्यपालन अभियंता, सेतु, लोक निर्माण विभाग रायगढ़ संभाग, ने बताया कि:
“जल्द ही कार्य प्रारंभ किया जाएगा। पहले भुगतान की समस्या थी, लेकिन अब SCA के तहत स्वीकृति मिलने से भुगतान सुचारू रूप से हो सकेगा। भू-अर्जन का मुआवजा SDM कार्यालय में जमा हो चुका है, बस एक भूमिस्वामी को छोड़कर सभी का भुगतान हो गया है। जल्द ही काम फिर से शुरू होगा।”

ठेकेदार ने क्या कहा?

विशंभर दास अग्रवाल, ठेकेदार, का कहना है:
“इस कार्य हेतु हमारा अनुबंध समाप्त हो गया है। विभाग द्वारा राशि का भुगतान समय पर नहीं किया गया, इसलिए हमने काम रोक दिया।”

जनता ने उठाई जांच की मांग, होगा एक्शन या दब जाएगा मामला?

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण में हो रही देरी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? क्या इस पुल का निर्माण समय पर पूरा होगा या फिर जनता को और लंबा इंतजार करना पड़ेगा?

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