Information related to glaucoma was given to the patients and their relatives in the eye ward of the Government District Hospital
15 मार्च तक मनाया जा रहा जिले में विश्व ग्लूकोमा सप्ताह
मेडिकल कालेज एवं शासकीय जिला चिकित्सालय में किया जाता है ग्लूकोमा का नि:शुल्क जाँच एवं उपचार
रायगढ़ / कलेक्टर कार्तिकेया के निर्देशन एवं सीएमएचओ डॉ.अनिल जगत के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय अंधत्व एवं अल्पदृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत ‘ग्लूकोमा मुक्त विश्व के लिए एक जुट होना’ थीम पर रायगढ़ सहित जिले के समस्त विकासखण्ड में 15 मार्च 2025 तक जनसामान्य में जागरूकता लाने विश्व ग्लूकोमा सप्ताह मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में गत 10 मार्च को शासकीय जिला चिकित्सालय रायगढ़ के नेत्र वॉर्ड में मरीज एवं उनके परिजन के साथ-साथ चिकित्सालय के डॉक्टर सहित समस्त उपस्थित स्टॉफ को ग्लूकोमा संबंधित जानकारी दी गई। जिसमें रोग के कारण एवं उपचार की जानकारी वरिष्ठ नेत्र सहायक अधिकारी द्वारा बताया गया कि मनुष्य में 40 वर्ष बाद आँखों में कंचियाबिंद होने की संभावना रहती है। प्रत्येक व्यक्ति को 40 वर्ष होने पश्चात हर 6 माह में अपने आँखो का जाँच नेत्र रोग विशेषज्ञ से करवाना चाहिए। मनुष्य के आँखो मे तरल पदार्थ एक्वस भरा होता है यह आँखो के गोले को चकना बनाये रहता है यदि तरल पदार्थ का प्रवाही तंत्र प्रभावित होने पर आँखो के अंदर का दबाव बढ़ जाता है। फलस्वरूप नेत्र के पर्दे के तंतु को छती पहुँचती है जिससे देखने मे कठिनाई होती है। इस बीमारी से नजर खराब होने के बाद उसका कही उपचार नही हो सकता इस बीमारी को काला मोतिया भी कहा जाता है।
ग्लूकोमा होने के प्रमुख कारण आँखो मे तेज दर्द का होना आँखे लाल हो जाता है दृष्टि कमजोर हो जाता है यदि इसका उपचार तुरंत कराया जाए तो बची होई नजर को बचाया जा सकता है। दूसरे प्रकार के ग्लूकोमा मे आँखो मे दर्द नही होता रात को खम्भे के बल्ब को देखने पर बल्ब के चारो ओर इंद्रधनुस की तरह सप्तरंगी दिखाई देता है। इस कंडीशन मे धीरे-धीरे नजर कम होने लगता है। नजदीक का चश्में नंबर जल्दी-जल्दी बढ़ता है या कम उम्र में ही पढऩे मे कठिनाई होती है। नजरों के चारो तरफ का दायरा कम होने लगता है। उजाले से अंधेरे में जाने पर आँखो को अंधेरे में देखने में समय बढऩे लगता है। ग्लूकोमा का उपचार दवाइयों की सेवन से किया जाता है। विषम परिस्थिति में एक छोटा सा ऑपरेशन से उपचार कर रोशनी को बचाया जा सकता है। जागरूकता कार्यक्रम मे सहायक नोडल अधिकारी अंधत्व शाखा से श्री राजेश आचार्या ने बताया की ग्लूकोमा का उपचार जिले के मेडिकल कालेज, शासकीय जिला चिकित्सालय में नि:शुल्क जाँच एवं उपचार किया जाता है एवं समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मिलने वाले संभावित ग्लूकोमा के मरीज को नेत्र सहायक अधिकारी द्वारा प्राथमिक उपचार कर रेफर किया जाता है।





