MNREGA workers spent Diwali in darkness, now Holi too was colorless
पुसौर / प्रदेष षासन होली दिवाली सहित अन्य तीज त्यौहारों में अपने कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने जहां वेतन में बढोत्तरी के साथ साथ उन्हें बोनस एलाउंस आदि वितरण करती रही है वहीं मनरेगा के कर्मचारियों को पिछले 4 माह से वेतन नहीं मिल पाना षासन की अनदेखी है या फिर चुक लेकिन ये तो तय है कि है कि इनकी दिवाली भी अंधेरी में गुजरी और होली भी बेरंग रहा। इस संबंध में मिली जानकारी अनुसार पुसौर जनपद में कार्यरत 72 रोजगार सहायक, कार्यक्रम अधिकारी सहित 12 कर्मचारियों को दिसम्बर, जनवरी फरवरी एवं चलित माह मार्च के 17 दिन हो गये इन्हें वेतन नहीं मिला है वहीं इन्हें इनके हडताल के समय का 2 माह का वेतन भी नहीं मिला है इस प्रकार लगभग 6 माह का वेतन इन्हें अप्राप्त है। बिना वेतन के ये कर्मचारी अपने कामों को अंजाम तक इसलिये पहुंचा रहे हैं चूंकि कभी न कभी षासन द्वारा उन्हें उनका वेतन जरूर दिया जायेगा। ज्ञात हो कि नवम्बर दिसम्बर में दिवाली रही और मार्च में होली और इस बीच इन्हें वेतन नहीं मिला तो ऐसे स्थिति में इनका दर्द छलकना लाजिमी है लेकिन एक विभाग के खुंटे में बधने के बाद एक सीमा तक ही संबंधित कर्मचारी अपनी मांग कर सकता है इसलिये उफ किये बगैर ये अपने काम को साहुकारो और अपने संगे संबंधियों के सहयोग से भरण पोशण होते हुये अंजाम तक पहुंचा रहे हैं। वेतन वितरण विसंगति के संबंध में यहां के कुछ कर्मचारियों ने बताया कि भाजपा षासन में वेतन की बढोत्तरी होती है लेकिन नियमित नहीं मिलता वहीं बिते कांग्रेस षासन में वेतन में कोई बढोत्तरी नहीं लेकिन नियमित मिलता था। यह तथ्य बडे बडे जानकारों को भी समझ में नहीं आ सकता कि वास्तविकता क्या है लेकिन जो भी हो नियमित वेतन पाना कर्मचारियों का हक है जिसमें षासन को तत्काल अमल में लाने की जरूरत है।



