A grand procession was taken out with the chants of Sai Jhulelal
रायगढ़। रायगढ़ की फिजा में भक्ति की ऐसी बयार बही कि हर दिल साईं झूलेलाल के रंग में रंग गया। सामूहिक 501 पूज्य बहराणा साहेब सतगुरु लाल साईं जी के आलौकिक सान्निध्य के बाबा गुरमुखदास सेवा समिति रायगढ़ (छःग) के नेतृत्व में चार दिवसीय भक्तिमय उत्सव ने शहर को आस्था के उल्लास में डुबो दिया। इस उत्सव का चरमोत्कर्ष कच्ची खोली से केलो नदी के मरीन ड्राइव तक भव्य शोभा यात्रा निकली। जहां साईं झूलेलाल जी के जयकारों ने आसमान को चीर दिया। 11 मई से शुरू हुए इस अनूठे आयोजन के पहले तीन दिन झूलेलाल जी की कथा के नाम रहे। कथा-पंडाल में भक्तों का हुजूम उमड़ा, जहां कथावाचकों ने साईं झूलेलाल जी के चमत्कारों और भक्ति-मार्ग की कहानियों को इस अंदाज में पिरोया कि हर आंख नम और हर मन प्रेम से सराबोर हो गया। भजनों की स्वरलहरियों ने माहौल को और रसमय बनाया। बच्चे, युवा और बुजुर्ग—सभी ने कथा में डुबकी लगाई और आध्यात्मिक सुकून पाया। 14 मई को चौथे दिन, शोभा यात्रा ने रायगढ़ की सड़कों को भक्ति का रंगमंच बना दिया। कच्ची खोली से शुरू हुई यह यात्रा फूलों से सजी पालकी और ढोल-नगाड़ों के साथ मरीन ड्राइव पहुंची। भक्तों में जोश का समंदर उड़ेल दिया। नाचते-गाते भक्तों ने “जय झूलेलाल” के उद्घोष से शहर को गुंजायमान कर दिया। राहगीर भी ठिठककर इस भक्ति-उत्सव का हिस्सा बन गए। यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सिंधी सामाजिक एकता का भी प्रतीक बना। हर वर्ग और समुदाय के लोग कंधे से कंधा मिलाकर जयकारे लगाते दिखे। आयोजकों का कहना है, “यह उत्सव भक्ति के साथ-साथ रायगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को भी संजोता है।” एक भक्त ने भावुक होकर कहा, “ऐसा लगा जैसे साईं झूलेलाल खुद हमारे बीच उतर आए हों।” रायगढ़ में यह भक्तिमय उत्सव एक ऐसी मिसाल बन गया, जो आने वाले सालों में और बड़े रूप में सामने आएगा। भक्ति, उल्लास और एकता का यह संगम रायगढ़वासियों के लिए अविस्मरणीय बन गया।





