The vigilance campaign of Mahila Samanvay Samiti in Raigarh is getting social support
समाजिक संगठनों का महिला सुरक्षा अभियान को मिल रहा व्यापक समर्थन
रायगढ़। महिला समन्वय समिति रायगढ़ द्वारा महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को लेकर चलाए जा रहे सतर्कता अभियान को लगातार सामाजिक संगठनों का समर्थन मिल रहा है। समाज में महिलाओं की गरिमा और आत्मनिर्भरता के लिए इस अभियान ने एक व्यापक जनजागरण की भूमिका निभानी शुरू कर दी है।
कोलता समाज ने जताया समर्थन
कोलता समाज रायगढ़ की ओर से समिति के अभियान को संस्थागत समर्थन प्रदान किया गया है। इस समर्थन पत्र पर कोलता समाज के संभागीय अध्यक्ष रत्थु गुप्ता, महिला प्रकोष्ठ से गीता गुप्ता, शाखा अध्यक्ष खीती भूषण गुप्ता, शाखा प्रतिनिधि अनीता नायक तथा आंचलिक अध्यक्ष मनोरंजन नायक के संयुक्त हस्ताक्षर हैं। उन्होंने इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
यादव समाज जनकल्याण समिति ने किया समर्थन
यादव समाज जनकल्याण समिति रायगढ़ ने भी सतर्कता अभियान का समर्थन करते हुए संयुक्त पत्र जारी किया है। इस पत्र पर प्रांतीय उपाध्यक्ष बीपी यादव, संभाग अध्यक्ष संगीता यादव, अनुपमा यादव, सरस्वती कबराइत, विभूति यादव, आशीष यादव सहित कई सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। समिति ने इसे सामाजिक परिवर्तन की दिशा में सशक्त पहल बताया है।
थवाईत समाज की अध्यक्ष दिशा थवाईत ने दिया समर्थन
थवाईत समाज रायगढ़ की ओर से अध्यक्ष दिशा थवाईत ने महिला सुरक्षा अभियान को समर्थन देते हुए पत्र सौंपा। उन्होंने कहा कि आज समाज को महिलाओं की अस्मिता और आत्मबल को मजबूत करने के लिए ऐसे अभियानों की सख्त जरूरत है।
चौहान समाज की सहभागिता
चौहान समाज रायगढ़ की ओर से भी महिला समन्वय समिति के कार्यों का समर्थन किया गया है। समर्थन पत्र में महावीर चौहान (गुरुजी), हरिमति चौहान, सविता, दुनिका, पूनम सहित अन्य प्रमुख सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। उन्होंने समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए सकारात्मक संदेश बताया।
समिति ने जताया आभार, और समर्थन की अपील
महिला समन्वय समिति रायगढ़ ने इन सामाजिक संगठनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि यह समर्थन न केवल उनकी ताकत बढ़ाता है, बल्कि समाज में महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। समिति ने अन्य समाजों और संस्थाओं से भी इस अभियान से जुड़ने की अपील की है। यह अभियान महिलाओं की सुरक्षा नहीं, बल्कि पूरे समाज की संवेदनशीलता का प्रतीक बनता जा रहा है।



