- महिला संगठनों ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग
- शहर में बढ़ती गुप्त गतिविधियों से महिला सुरक्षा पर संकट
रायगढ़ |
रायगढ़ शहर में अवैध रूप से संचालित हो रहे ब्यूटी पार्लरों और गुप्त सैलूनों की बढ़ती संख्या ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था बल्कि महिला सुरक्षा और सामाजिक मर्यादाओं पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। कई स्थानों पर बिना पंजीकरण और बिना पुलिस सत्यापन के युवक-युवतियां कार्यरत हैं, जिनकी गतिविधियों पर न तो प्रशासन की निगरानी है और न ही नगर निगम का कोई नियंत्रण। रायगढ़ की बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के बीच प्रशासनिक सतर्कता बेहद आवश्यक है। यदि जल्द ही इन अवैध संस्थानों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह न सिर्फ महिलाओं के लिए खतरा बनेगा बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी प्रभावित करेगा। अब समय है कि प्रशासन जागे और ठोस कार्यवाही करे।
पहचान और निगरानी के बिना संचालित हो रहे हैं पार्लर
सूत्रों के अनुसार, इन पार्लरों में कई युवक-युवतियां बिना किसी वैध दस्तावेज और पहचान पत्र के काम कर रहे हैं। इनमें से कुछ स्थानों पर अनैतिक गतिविधियों की भी आशंका जताई गई है। शहर में इन पार्लरों की न कोई सूची उपलब्ध है, न ही इनकी नियमित जांच की जा रही है।
महिला संगठन और हिंदू जागरण मंच की सख्त चेतावनी
महिला समन्वय समिति और हिंदू जागरण मंच ने इस मुद्दे पर लगातार प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। संगठनों ने ज्ञापन सौंपकर शहरभर के अवैध पार्लरों की जांच, बंदी और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
हिंदू जागरण मंच के एक पदाधिकारी ने कहा:
“हमने प्रशासन को स्पष्ट जानकारी दी है कि शहर में किन-किन स्थानों पर अवैध गतिविधियाँ संचालित हो रही हैं। लेकिन प्रशासन की चुप्पी चिंता का विषय बन चुकी है। यह असंवेदनशील रवैया स्वीकार्य नहीं है।”
प्रशासन की निष्क्रियता पर उठे सवाल
जहां सामाजिक संगठन अपनी भूमिका निभा रहे हैं, वहीं नगर निगम और पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर आम जनता में रोष व्याप्त है। अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि शहर में कितने ब्यूटी पार्लर वैध हैं और कितने अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। यह लापरवाही आने वाले समय में बड़े खतरे का कारण बन सकती है।
महिला समन्वय समिति और हिंदू जागरण मंच की जनहित में प्रमुख मांगे
सभी ब्यूटी पार्लरों और सैलूनों की तत्काल जांच की जाए। सभी कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य किया जाए। बिना पंजीकरण चल रहे संस्थानों को सील किया जाए। उनके मालिकों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए। महिला सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए और इस दिशा में दृढ़ नीतिगत कदम उठाए जाएं।


