कांकेर, 9 फरवरी 2024/ जिला कार्यालय के सभाकक्ष में आज विभिन्न विभागों के अधिकारियों, पीपीआईए फेलो, टीआरआई और डब्ल्यूआरआई संस्था के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में ‘परिदृश्य बहाली’ पर विस्तृत चर्चा की गई। विभिन्न विभागों से उपस्थित अधिकारियों ने परिदृश्य बहाली के संबंध में अपने विभाग की भूमिका तथा इसके विकास के लिए अपने सुझाव दिए। कार्यक्रम के तहत तैयार होने वाली कार्ययोजना महात्मा गांधी नरेगा द्वारा विभिन्न विभागीय योजनाओं के अभिसरण से तीन वर्षों में संपादित की जाएगी।
कार्यशाला में टीआरआई के एसोसिएट डायरेक्टर श्री श्रीष् कल्याणी ने बताया कि हम पारिस्थितिक विकास में कोई नया काम नहीं अपितु पहले से ही ये सभी कार्य हो रहे थे, जो खंड-खंड में थे। आज आवश्यकता है कि कैसे सभी विभागों द्वारा समेकित प्रयास हो, जिससे परिदृश्य बहाली का बेहतर कार्य हो सके। कार्यक्रम के अगली कड़ी में डब्ल्यूआरआई इंडिया से श्री सिद्धार्थ एडाके ने विस्तार से बताया कि परिदृश्य बहाली क्यों आवश्यक है? साथ ही किन उपायों से परिदृश्य बहाली संभव है। सतत विकास लक्ष्य के किन चार उद्देश्यों से यह सीधा संबंध रखता है। आज जलवायु परिवर्तन संयम के लिए कार्बन अवशोषित करना क्यों आवश्यक है? कैसे ग्रामीण विकास विभाग, कृषि विभाग, वन विभाग के योजनाओं के प्रभावी अभिसरण से बेहतर परिणाम जिला-सीधी, मध्य प्रदेश में देखने को मिले हैं, इस पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला के अगले चरण में टीआरआई के सीनियर प्रैक्टिशनर श्री आशुतोष नंदा ने कांकेर में अब तक आए सूखों के बारे में बात की। कैसे, बारिश होने पर ऊपरी उपजाऊ भूमि का क्षरण हो रहा है, जबकि नए एक सेंटीमीटर मिट्टी की परत बनने में 200 से 400 वर्ष लगता है। इस प्रकार से उन्होंने विभिन्न पहलुओं पर ध्यान आकर्षित करते हुए सभी प्रतिभागियों को विचार करने पर मजबूर किया। तत्पश्चात कार्यशाला में विभिन्न विभागों ने परिदृश्य बहाली के संबंध में अपने बहुमूल्य सुझाव दिए।
जिला पंचायत के सीईओ श्री सुमित अग्रवाल ने बताया कि “यह उनके रुचि का विषय है। यदि परिदृश्य बहाली के संबंध में कार्य अभी नहीं शुरू किया गया, तो बहुत देर हो जाएगी। संसाधन सीमित हैं, आने वाली पीढ़ियों को सभी आवश्यक वस्तु मिले, इसके लिए अभी से बेहतर योजना बनाने की आवश्यकता है। इसके लिए हम सभी को मिलकर कार्य करना होगा। हम अपने जिम्मेदारियां का निर्वहन कर बेहतर उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं, जिसे भविष्य में अन्य विकासखंडों में स्केल अप किया जा सकता है। हमें छोटे-छोटे प्रयास निरंतर करने होंगे और सभी विभागों की भूमिका इसमें इंटरलिंक है। विभागों के प्रभावी अभिसरण से ही यह संभव है। कार्यक्रम के अंत में आशुतोष मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।



