One returned home and left Christianity. A family in Masulpani village, Rajpur, fell prey to the fraud of curing illness.
नरहरपुर अंतर्गत के राजपुर गांव में एक परिवार ने ईसाई धर्म छोड़कर अपने मूल धर्म आदिवासी समाज में वापसी की है। इनमें 2 बच्चे भी शामिल है। ये लोग पिछले 1-2 साल से ईसाई धर्म में फंसे हुए थे। जिन्हें प्रलोभन देकर, बहला फुसलाकर धर्म छोड़ने को मजबूर किया गया था। शत्रुघन शोरी ने बताया कि वे लंबे समय से मानसिक तनाव में थे। वे बीमारी के इलाज के लिए गए थे। जहां उनसे प्रार्थना कराई गई। पीने के लिए पानी दिया गया। उस वक्त तो बीमारी ठीक हो गई लेकिन बाद में फिर से परेशानी बढ़ गई इसके बाद उन्होंने फिर अपने धर्म में आने की सोची। वहां उन्हें पढ़ने के लिए बाइबिल दी जाती थी जिसमें ईसाई धर्म के नियम होते थे। जिनसे उनका ब्रेन वॉश किया जाता था। वहां उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के नियम पढ़ाए जाते थे बुखार ठीक करने का दावा करते थे उनका लड़की बुखार से पीड़ित था इलाज के लिए गए थे। जहां उन्हें पानी देकर प्रार्थना कराई गई और लगाने के लिए तेल दिया गया। शत्रुघन शोरी” ठीक हो गया। इसके बाद वे उसी धर्म में चले गए बाद में उन्हें एहसास हुआ कि उनके बच्चे बड़े होंगे तो शादी ब्याह में दिक्कत होंगी इसलिए वापस आदिवासी समाज में आने की सोची। करीब 1-2 साल बाद अपने मूल धर्म में लौटने से उन्हें मानसिक शांति मिली है। सभी परिवार को भी अपने धर्म को नहीं छोडूंगा करके वचन भी दिया है समाज प्रमुख ने जाति जनगणना का हवाला दिया आदिवासी समाज के क्षेत्र अध्यक्ष रामलाल कवाडे़ ने बताया कि, लालच देकर गांव के लोगों को ईसाई धर्म में जोड़ा जा रहा है। जातिगत जनगणना जब होगी तब अपना समाज छोड़े हुए लोगों को दिक्कत होगी।इसलिए हम लोगों को जागरूक होना होगा नरहरपुर क्षेत्र के ग्रामीण शामिल रहे” उपाध्यक्ष शंकर शोरी, सचिव सुनील शोरी, रामचंद्र मंडावी पटेल, संरक्षक गंगाराम कोड़ोपी, कोषाध्यक्ष गनदेव रेखाम, सल्लाहकार रामचन्द मण्डावी, सदस्य गोहिर राम शोरी, रमेश कुंजाम, दबरु नेताम, रोशन बघेल, देवलाल पटोदी, चेतराम मांडवी, धर्मेंद्र सुरोजिया, गौरव शोरी, नेतृत्व में सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने रविवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इन सभी का स्वागत किया।फूल मालाओं से उनका स्वागत किया गया और शंकर मरकाम भीमा का कहना है कि बस्तर संभाग में धर्मांतरण एक प्रमुख सामाजिक मुद्दा रहा है। यह क्षेत्र में नक्सलवाद के बाद दूसरी बड़ी चुनौती मानी जाती है अभी भी हजारों लोग दूसरे धर्म में फंसे हुए है। आदिवासी समाज पिछले कई सालों से इसके खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहा है कई लोग संपर्क में अभी भी बने हुए है आने वाले समय में बड़ी संख्या में लोग मूल वतन में वापसी करेंगे।



