०० महज 10 प्रतिशत तबादले पर ही गए अधिकारी 90 प्रतिशत तबादलों में चली सेटिंग
०० बिलासपुर के 6 डॉक्टरों का बस्तर किया गया था तबादला, सेटिंग के बल पर रुक गया ट्रांसफर
बिलासपुर। मस्तूरी : पशुपालन विभाग एक ऐसा विभाग जहाँ 20 वर्षों से कभी डॉक्टरों का तबादला नहीं हुआ था वहीं पर उस विभाग पर तबादले की एक लहर चलती है जिस पर पूरे छत्तीसगढ़ से डॉक्टरों को ट्रांसफर किया जाता है
लेकिन लगभग 90 प्रतिशत सेटिंगबाज़ अफसर पिछले छह माह से अपने यथा स्थान पर जमे हुए हैं| कथित लोगो ने उप संचालक एवं डिप्टी डायरेक्टर से सेटिंग कार्ड खेला और अपना तबादला रुकवा दिया है इसे हम प्रसानिक सेटिंग भी कहते हैं, शासन यदि कोई आदेश जारी करता है तो उसे प्रशासन कैसे रोक सकता है!! ये सारा खेल पशु पालन विभाग में देखने को मिल रहा है!!
शासन किसी विभाग पर यदि कोई टाँसफ़र प्रक्रिया करती है तो वह निर्णय मुख्य सचिव करता है जो कि आप उसे यदि रुकवाना चाहते हैं तो वो कोर्ट की शरण ले सकता है लेकिन पशुपालन विभाग पर सेटिंग प्रक्रिया ज़बरदस्त है जो कि पिछले 20साल से चल रही है, तबादला आदेश जारी होने के बाद अधिकारी को कोर्ट जाने की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि उन्हें ये अच्छे से पता है कि सेटिंग से सब कुछ ठीक हो जाता है ! बिलासपुर से पशुपालन विभाग के 6 डॉक्टरों का तबादला बस्तर ज़िले पर किया था सभी अपनी अपनी सेटिंग पर क़ामयाब हो गए इसे कहते हैं प्रशासनिक सेटिंग!!
गौरतलब है कि बिलासपुर गौसेवा समिति ने पूरे बिलासपुर में जल सत्याग्रह किया था और दण्डवत यात्रा आंदोलन कर लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरो के ख़िलाफ़ मुहिम चलाई थी की सरकार लापरवाह डॉकटर का ट्रांसफर करे एवं 2018 से एवीएफ़ओ की भर्ती नहीं की गई है उन को बहाल करे ताकि नए युवा जो Dr. का कोर्स करके घर बैठे हुए उन्हें भी जॉब पे रखा जा सके !! वर्तमान में 3 हजार बच्चे बेरोजगार घर बैठे है!!! वर्सों से एक ही स्थान पर जमे डॉकटर सरकारी नौकरी के अलावा अपने निजी हॉस्पिटल भी चलाते हैं और यहा तक कि वे लोगो के घर जा कर मोटी फ़ीस लेकर जीव जंतुओं का इलाज करते हैं!! शासन ने सभी विषयों पर गंभीरता से विचार करते हुए इन का ट्रांसफ़र किया था लेकिन अधिकारियो के सेटिंग का असर ये हुआ कि ये सभी अधिकारी अपने जिले से बाहर नहीं गए हैं बल्कि सभी इसी जिले में अपनी ड्यूटी कर रहे हैं!!!
अब इसमें देखना है की क्या सरकार में बैठे राजनेताओं की चलती है या फिर सरकार में बैठे अधिकारियों की चलती है!!! ये अजब गजब मामला पशु पालन विभाग के अधिकारियों ने किया है एक तरफ़ सरकार गौ धाम योजना ला रही है और दूसरी तरफ़ इस योजना में डॉकटर को नियुक्त नहीं जोड़ पा रही है इनकी संख्या नहीं बढ़ा पा रही है सरकार को चाहिए इस मामले में कोई ठोस कार्यवाही करे की शासन का राज होता है की प्रशासन का राज होता है ये आमजन पूछता है!!!
वही इस मामले में गौ सेवक विपुल शर्मा का कहना है कि अगर ये अधिकारी सरकार के टाँसफ़र आदेश का पालन नहीं करते हैं तो हमारी शिकायत क्या सुनेगे !! सरकार के आदेश का उल्लंघन किया जा रहा है तो हम लोग कौन है। अब आगे फिर आंदोलन किया जाएगा सर्व प्रथम जिले में बैठे पशु पालन विभाग के अधिकारियों का घेराव करेंगे और उनका पुतला फूँका जाएगा!!
उन्होंने कहा कि हमने आंदोलन किया सरकार ने हमारी पीड़ा सुनी थी ट्रांसफर का आदेश सरकार नें दिया लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने उस ट्रांसफर को नहीं किया जो की पूर्णता ग़लत है आने वाले समय में जो भी आंदोलन होगे उसका समाधान निकाला जाये अन्यथा आंदोलन किया जायेगा! पिछले 23 वर्षों से घायल गौ माता के लिए स्थान की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार में बैठे मंत्री नेता – अधिकारीओ को आदेश देते हैं पूरी प्रक्रिया होती है लेकिन अधिकारी कोई इस विषय पर संज्ञान नही लेते हैं अब देखना है कि सरकार इस विषय पर कितनी गंभीरता दिखाती है!! क्या गौमाता राज्य माता घोषित होने के बाद सरकार घायल गौवंश के प्रति संवेदन शील होगी या फिर इस विषय पर कोई कार्यवाही करेगी!
90% डॉकटर सेटिंग करे है पूरे प्रदेश में 10% जो बेचारे छोटे कर्मचारीनहीं कर पाये वो चले गए
इस विभाग में छोटे कर्मचरियों के तबादले हुए उन्हें जाना पड़ा पर ये नहीं हिलते हैं कारण एक ही की शहरी आबादी छेत्रों में कुत्ते का इलाज में बहुत पैसा है कमाई है दवाई में मेडिकल स्टोर पर भी कमीशन मिलता है और ख़ुद का क्लिंनिक भी चला रहे है|



