A new chapter in security and development in the Naxal-affected area of Bijapur – two new camps established, Maoist memorial demolished
बीजापुर@रामचनद्रम एरोला – जिले के नक्सल प्रभावित अंचलों में सुरक्षा और विकास की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। छत्तीसगढ़ शासन की “नियद नेल्ला नार” योजना के अंतर्गत सुरक्षा बलों ने बीजापुर के दुर्गम इलाकों में दो नए सुरक्षा एवं जन-सुविधा कैम्पों की स्थापना की है, वहीं दूसरी ओर माओवादियों के प्रभाव क्षेत्र में उनके द्वारा निर्मित 20 फीट ऊंचे स्मारक को ध्वस्त कर दिया गया है।
कांडलापर्ती-2 और पील्लूर में स्थापित हुए सुरक्षा कैम्प
थाना भोपालपटनम क्षेत्र के ग्राम कांडलापर्ती-2 में 25 अक्टूबर 2025 को और थाना फरसेगढ़ क्षेत्र के ग्राम पील्लूर में 27 अक्टूबर 2025 को नवीन सुरक्षा एवं जन-सुविधा कैम्पों की स्थापना की गई।
यह कैम्प ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पेयजल, पीडीएस, मोबाइल नेटवर्क, सड़क और पुल-पुलिया जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में मील का पत्थर साबित होंगे।
कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और विपरीत मौसम के बावजूद सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए कैम्पों की स्थापना पूरी की। इस कदम से क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ विकास की रफ्तार को भी नई दिशा मिलेगी।
पील्लूर के जंगलों में माओवादी स्मारक ध्वस्त
सुरक्षा बलों ने नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत एक और बड़ी सफलता अर्जित की है।
26 अक्टूबर 2025 को डीआरजी, केरिपु 214 बटालियन और कोबरा 206 की संयुक्त टीम ने पील्लूर के जंगलों में माओवादियों द्वारा निर्मित 20 फीट ऊंचे स्मारक को ध्वस्त कर दिया।
यह स्मारक माओवादियों द्वारा अपने मारे गए साथियों की स्मृति में बनाया गया था और ग्रामीणों पर वैचारिक प्रभाव जमाने का माध्यम था। इसकी ध्वस्ति माओवादियों की मनोवैज्ञानिक पकड़ पर सीधा प्रहार मानी जा रही है।नक्सल उन्मूलन में लगातार सफलता
वर्ष 2024 से अब तक बीजापुर जिले में 21 सुरक्षा कैम्प स्थापित किए जा चुके हैं।
इन अभियानों के फलस्वरूप 599 माओवादी आत्मसमर्पण, 196 माओवादी मारे गए, तथा 986 माओवादी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
बस्तर संभाग में ही अब तक 210 माओवादियों ने हथियार डाल आत्मसमर्पण किया है, जो नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी रणनीतिक सफलता है।
इस अभियान में पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुन्दरराज पी., आईजी (सीआरपीएफ ऑप्स) शालिन, डीआईजी कमलोचन कश्यप, डीआईजी (सीआरपीएफ बीजापुर) बी.एस. नेगी, तथा एसपी डॉ. जितेन्द्र कुमार यादव सहित पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने नेतृत्व और समन्वय की भूमिका निभाई। सुरक्षा बलों के इन प्रयासों से अब तक जिले में 43 नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित हो चुके हैं और नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, मोबाइल नेटवर्क एवं अन्य जन-सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है।
🔹 विकास और शांति की दिशा में आगे बढ़ता बीजापुर
स्थानीय नागरिकों ने नए कैम्पों की स्थापना और माओवादी स्मारक ध्वस्त होने पर राहत और उत्साह व्यक्त किया है। इन अभियानों से न केवल क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि शासन की विकास योजनाओं के ज़मीनी क्रियान्वयन को भी गति मिली है।
प्रशासन का मानना है कि इस तरह के समन्वित प्रयासों से बीजापुर और आसपास के अंचलों में स्थायी शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।



