Ma Mangala Ispat’s EIA report is blatantly copy-pasted, and preparations for the public hearing are under scrutiny.
रायगढ़ जिले के नटवरपुर स्थित मां मंगला इस्पात प्राइवेट लिमिटेड की विस्तार परियोजना के लिए तैयार पर्यावरण प्रभाव आकंलन (ईआईए) रिपोर्ट में गंभीर गड़बडिय़ां सामने आई हैं। रिपोर्ट में कई हिस्सों को अन्य उद्योगों और पूर्व परियोजनाओं की रिपोर्ट से हूबहू कॉपी कर पेस्ट किया गया है। इस कागजी खानापूर्ति के आधार पर कंपनी अब पर्यावरणीय जनसुनवाई की तैयारी में जुटी है, जिससे प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
कंपनी की प्रस्तावित योजना में दो नए स्पंज आयरन किलन, इंडक्शन फर्नेस, रोलिंग मिल, फ्लाई ऐश ईंट संयंत्र और 32.5 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता का विस्तार शामिल है। परियोजना के लिए आवेदन 18 दिसंबर 2024 को दिल्ली स्थित पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएससी) को भेजा गया था, जिसे 23 दिसंबर को टम्र्स ऑफ रेफरेंस (टीओआर) की मंजूरी दी गई।
लेकिन अध्ययन रिपोर्ट में कई ऐसे पैराग्राफ हैं जो शब्दश: अन्य उद्योगों की पुरानी रिपोर्टों से उठाए गए हैं। रिपोर्ट में क्षेत्रीय भौगोलिक स्थिति, पारिस्थितिक प्रभाव, जनसंख्या घनत्व और वन क्षेत्र के विवरण में एक जैसी पंक्तियां दोहराई गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह कॉपी-पेस्ट कल्चर पर्यावरणीय मूल्यांकन प्रक्रिया की साख को ध्वस्त कर देता है।
स्थानीय ग्रामीणों द्वारा भी जनसुनवाई की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई जा रही है। उनका कहना है कि कंपनी ने ग्राम पंचायतों को पूरी जानकारी दिए बिना जनसुनवाई की तारीख घोषित कर दी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने पहले भी प्रदूषण नियंत्रण और अपशिष्ट निपटान के नियमों की अनदेखी की थी, जिसके कारण आसपास के क्षेत्रों में जल स्रोतों और खेती की जमीनों पर असर पड़ा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मत है कि यदि रिपोर्ट में कॉपी-पेस्ट सामग्री पाई जाती है तो यह नियमों का उल्लंघन है और ऐसे दस्तावेजों के आधार पर मंजूरी दी जाना पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की भावना के विपरीत है। विशेषज्ञ समिति को रिपोर्ट का स्वतंत्र मूल्यांकन कराकर दोबारा संशोधित रिपोर्ट मंगाने का अधिकार है।
क्या है मां मंगला इस्पात विस्तार परियोजना
स्थान – गांव नटवरपुर, तहसील घरघोड़ा, जिला रायगढ़
प्रस्ताव – 60,000 टीपीए से बढ़ाकर 2,97,000 टीपीए स्पंज आयरन उत्पादन
इंडक्शन फर्नेस, रोलिंग मिल और बिजली संयंत्र की क्षमता में वृद्धि
35,000 टीपीए फ्लाई ऐश ईंट निर्माण संयंत्र की स्थापना
कुल बिजली उत्पादन क्षमता – 32.5 मेगावाट
पर्यावरण को आंकड़ों की नहीं, ईमानदारी की जरूरत है
पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया एक तकनीकी औपचारिकता नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति के बीच संतुलन का संवैधानिक दायित्व है। यदि कंपनियां अपनी परियोजनाओं के लिए रिपोर्टों की नकल करके प्रस्तुत करती हैं तो यह न केवल कानून का अपमान है बल्कि आने वाली पीढिय़ों के प्रति अपराध भी है। मां मंगला इस्पात की रिपोर्ट में जो समानताएं सामने आई हैं, वे इस बात का प्रमाण हैं कि हमारी पर्यावरणीय व्यवस्था किस हद तक कागजी बन गई है। प्रशासन और विशेषज्ञ समिति को चाहिए कि इस रिपोर्ट की स्वतंत्र जांच कराए और सुनिश्चित करे कि रायगढ़ जैसे औद्योगिक जिलों में विकास पर्यावरणीय न्याय के साथ आगे बढ़े।




