The suffering of a displaced Baiga family from the village of Bokrakachar—they haven’t received a house even after 15 years! They demand justice from the Collector.
मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट
= वन विभाग में चल रहे हैं कालाबाजारी का खेल,
मुंगेली-लोरमी – अचानकमार टाइगर रिज़र्व क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विस्थापित ग्राम बोकराकछार के एक ग्रामीण ने प्रशासन पर झूठी रिपोर्ट जारी करने और मकान–जमीन आबंटन सूची में नाम होने के बावजूद आवास न दिलाए जाने का गंभीर आरोप लगाया है।
ग्रामीण आनदराम बैगा पिता गुलाब बैगा, जो मूलतः ग्राम बोकराकछार, ग्राम पंचायत कारीडोंगरी ब्लांक–लोरमी, जिला–मुंगेली के निवासी हैं, ने कलेक्टर मुंगेली को लिखित शिकायत देकर कहा है कि उन्हें वर्ष 2009-10 की विस्थापन आबंटन सूची में ‘मकान एवं जमीन प्राप्त’ दिखा दिया गया, जबकि वास्तविकता यह है कि उन्हें आज तक न तो जमीन मिली है और न ही पुनर्वास में मकान।
आनदराम बैगा का गंभीर आरोप — “15 साल से दर-दर भटक रहा हूँ, कहीं 2 महीने, कहीं 4 महीने रहना पड़ता है” शिकायत में आनदराम बैगा ने लिखा है कि विस्थापन के बाद से अब तक उनके पास रहने के लिए स्थायी जमीन या मकान नहीं है। मजबूरी में उन्हें कभी किसी के घर 2 महीने, कभी 4 महीने, तो कभी 6 महीने तक आश्रय लेकर जीवनयापन करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि ग्राम सुराज अभियान के दौरान भी उन्होंने आवेदन दिया था, जिसके बाद सहायक संचालक, अचानकमार टाइगर रिज़र्व लोरमी द्वारा जारी सूची में यह दिखाया गया कि उन्हें आवास और जमीन मिल चुकी है—जबकि यह पूरी तरह गलत और भ्रामक रिपोर्ट है।
ग्रामीण प्रशासन पर लापरवाही और गलत रिपोर्टिंग का आरोप
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि
वर्ष 2009-10 की 12(1) आबंटन सूची, बोकराकछार—सूची क्र. 06 में आनदराम बैगा का नाम “मकान एवं जमीन प्राप्त” वाले कॉलम में चढ़ा हुआ है। जबकि जमीन और मकान दोनों आज तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
इससे प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा फर्जी/भ्रामक रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजी गई।
आनदराम बैगा का कहना है कि इस लापरवाही के कारण उनका परिवार वर्षों से बिना आशियाने के असुरक्षित स्थिति में जीने को मजबूर है।
कलेक्टर से उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
उन्होंने कलेक्टर मुंगेली से मांग की है कि—
इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए एवं संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा उन्हें विस्थापित ग्राम बोकराकछार में तत्काल मकान और जमीन आवंटित कराई जाए।
आवेदन के साथ आबंटन सूची की प्रति एवं पूर्व में दिए गए आवेदन भी संलग्न किए गए हैं।
वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों को भी भेजी गई प्रतिलिपि
इस शिकायत की प्रतिलिपि निम्न वरिष्ठ नेताओं को भी भेजी गई है—
1. अरुण साव, विधायक लोरमी एवं उपमुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन
2. विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन
3. वन मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन
इससे स्पष्ट है कि ग्रामीण ने न्याय के लिए अब राज्य सरकार के उच्च स्तर तक गुहार लगाई है।
विस्थापन के 15 वर्ष बाद भी न्याय नहीं — बड़ा सवाल
यह मामला अचानकमार टाइगर रिज़र्व क्षेत्र के विस्थापित परिवारों की पुनर्वास व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
यदि सूची में “मकान एवं जमीन दे दी गई” दर्शाया जा रहा है, और जमीनी स्तर पर उसका अस्तित्व ही नहीं है, तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाता है।
ग्रामीणों में रोष — भविष्य में और भी खुलासे की संभावना
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बोकराकछार सहित कई गांवों के कई विस्थापित परिवार आज भी पुनर्वास को तरस रहे हैं।अगर जांच निष्पक्ष हुई, तो और भी ऐसे मामलों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
= वही वन विभाग लोरमी, खुडिया के एसडीओ सूर्यवंशी के द्वारा आनंद राम बैग वह उनके साथी के विषय में मुझे जानकारी नहीं है मैं जानकारी लेकर आपको बताता हूं करके कहा गया है
= वही मुंगेली कलेक्टर कुंदन कुमार के द्वारा जांच कर उचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया गया



