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सतनामी समाज ने थाने में सौंपा ज्ञापन,गुरु घासीदास जी एवं सतनाम धर्म का अपमान करने वालों पर कठोर कार्रवाई की मांग

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मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट

मुंगेली – लोरमी-/- दिनांक – 15 नवंबर 2025 सतनामी समाज, लोरमी द्वारा शुक्रवार को थाना लोरमी में एक महत्वपूर्ण एवं व्यापक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में समाज ने परम पूज्य संत शिरोमणि गुरु घासीदास जी, सतनाम धर्म, तथा सतनामी समाज के विरुद्ध लगातार फैलाए जा रहे भड़काऊ, असत्य एवं असवैधानिक बयानों पर गहरी आपत्ति व्यक्त की है।

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वही सतनामी समाज लोरमी प्रमुख तोरण खाण्डे, नरेश पाटले, मनभजन साहब टंडन ने बताया कि समाज ने पुलिस प्रशासन से दोषियों पर कानूनी प्रावधानों के तहत तुरंत और कठोर कार्रवाई की मांग की।

*मुख्य आरोप और घटनाएँ*…

1. विस्तार न्यूज़ लाइव डिबेट में आदेश सोनी का वक्तव्य

समाज ने कहा कि लाइव टीवी बहस के दौरान आदेश सोनी द्वारा सतनामी समाज के लिए अपमानजनक, मर्यादाहीन और असवैधानिक शब्दों का प्रयोग किया गया, जिससे लाखों लोगों की भावनाएँ आहत हुईं।

2. रायगढ़ की घटना — विजय राजपूत का अपमानजनक वीडियो

एक युवक विजय राजपूत द्वारा सोशल मीडिया पर गुरु घासीदास जी और सतनामी समाज के लिए अशोभनीय एवं आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए वीडियो वायरल किया गया।
समाज ने इसे धार्मिक सौहार्द्र के लिए खतरा और गंभीर अपराध बताया।

3. तखतपुर (टोनही पारा) — पंडित आशुतोष चैतन्य का कथावाचन मंच से समाज को अपमानित करना

ज्ञापन में इस घटना को सबसे गंभीर बताया गया। आरोपों के अनुसार—

सतनामी समाज को “महामूर्ख” कहना

समाज को गाय काटने वाला बताकर झूठा और भड़काऊ आरोप लगाना

सतनाम धर्म को विकृत रूप में प्रस्तुत करना

लोगों में समाज के प्रति घृणा पैदा करना

मंच से उकसाने वाले शब्दों का प्रयोग

धार्मिक मंच का दुरुपयोग

यह सभी कृत्य समाज के अनुसार संविधान का उल्लंघन, शांति भंग करने का प्रयास, तथा सामाजिक सौहार्द्र तोड़ने वाली गतिविधि हैं।

समाज ने यह भी उल्लेख किया कि पंडित आशुतोष चैतन्य पर छत्तीसगढ़ में पहले से कई FIR दर्ज हैं, इसके बावजूद वे कार्यक्रम कर रहे हैं और स्थानीय स्तर पर उन्हें संरक्षण जैसा माहौल दिखाई देता है।

4. सतनाम धर्म की अहिंसक परंपरा का उल्लेख

*समाज ने कहा*—
सतनाम धर्म का मूल संदेश “सत्य, अहिंसा और समानता” है।

इतिहास में महंत अंजोरदास जी और महंत लैनदास जी ने शांतिपूर्ण आंदोलनों से बूचड़खाने बंद कराए थे।

ऐसे अहिंसा-आधारित समाज पर “गाय हत्यारा” जैसे आरोप लगाना पूरी तरह मनगढ़ंत, झूठा और अपमानजनक है।

*समाज की प्रमुख माँगें*….

1. पंडित आशुतोष चैतन्य की अविलंब गिरफ्तारी

समाज ने कहा कि वे लगातार भड़काऊ, असत्य एवं कानून विरोधी बयान दे रहे हैं, इसलिए उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए और कानूनी धाराएँ कड़ाई से लागू की जाएँ।

2. पहले से दर्ज FIR पर कठोर कार्यवाही

लंबित मामलों को तत्परता से आगे बढ़ाकर न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने की मांग की गई।

3. आदेश सोनी, विजय राजपूत समेत सभी दोषियों पर कानूनी कार्रवाई

समाज ने संविधान में निहित आईटी एक्ट, IPC की घृणा फैलाने वाली धाराएँ, तथा अन्य प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की।
4. पुलिस प्रशासन को भविष्य में रोकथाम के निर्देश

धार्मिक मंच और सोशल मीडिया से किसी भी जाति/धर्म विशेष के प्रति भड़काऊ, असत्य, या अपमानजनक बयान न फैलाने देने के लिए पुलिस को स्पष्ट निर्देश देने की मांग की गई।

*ज्ञापन सौंपते समय अनेक समाजजन उपस्थित*…
ज्ञापन सौंपने के दौरान समाज के प्रतिनिधि और वरिष्ठजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
हस्ताक्षरकर्ताओं में प्रमुख रूप से—
तोरण खंडे, रामेश्वर बंजारे, नरेश पाटले, मनभजन साहब टंडन, अश्वनी सोनवानी, पंडित नोहर दास, खेमचंद भिखारी, भोला सतनामी, प्रदीप गायकवाड, जनपद सदस्य लोरमी भार्गव,
ईश्वर कुरे,रोहित कुमार,कन्हैया कुमार अनंत,सूरजोत भार्गव,सोनदास,कमल राय,नरेंद्र पाल डाहिरे,परसराम मोहले,जय कुमार,अजय कुमार,बालकदास,मनध्या पाटले,चंदूकुमार बघेल,प्रमोद कुमार,दिलेर दिवाकर,अरविंद,गेंदलाल कुरे,
थानू सतनामी,योगेश डहरिया,लखन मोहले,सुनील बंजारे, अश्व आनंद,
तथा अनेक समाजजन शामिल रहे।समाज ने पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखते हैं, लेकिन धर्म और समाज के अपमान पर चुप नहीं रह सकते।

*समापन*
सतनामी समाज ने स्पष्ट कहा कि—
“हमारा संघर्ष संवैधानिक है, अहिंसक है।
लेकिन समाज और धर्म के अपमान को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

पुलिस अधिकारियों ने ज्ञापन प्राप्त कर कार्रवाई के लिए आश्वासन दिया है।

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