Allegations of grabbing 41 hectares of tribal land in Bijapur, MLA Mandavi said – “Attack on existence”
बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – जिला कांग्रेस कमेटी बीजापुर ने एक प्रेस वार्ता में बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि उसूर तहसील के संकनपल्ली गांव में आदिवासी परिवारों की करीब 41 हेक्टेयर पैतृक जमीन को धोखे और प्रशासनिक मिलीभगत से गैर-आदिवासियों के नाम कर दिया गया है। विधायक विक्रम मंडावी ने इसे बस्तर के आदिवासियों की संस्कृति और अस्तित्व पर सीधा हमला बताया। मंडावी ने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्र में पेसा कानून लागू होने के बाद भी जमीनों को गुपचुप तरीके से पहले संकनपल्ली निवासी रामसिंग यादव के नाम चढ़ाया गया, और फिर उसने इन्हें जगदलपुर के कमलदेव झा व अन्य को बेच दिया। आदिवासी खसरा नंबरों की जमीन बिना ग्राम सभा की अनुमति, बिना वैध प्रक्रिया और बिना जांच के नामांतरित कर दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में गैर-आदिवासी के नाम इतनी बड़ी जमीन कैसे दर्ज हुई? राजस्व अधिकारियों ने अनुमति के बिना रजिस्ट्री कैसे कर दी? और अब खरीदार पटवारी पर ऑनलाइन प्रविष्टि का दबाव क्यों बना रहे हैं?
कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच, दोषियों पर FIR, अवैध रजिस्ट्री रद्द करने और जमीन को आदिवासियों को वापस दिलाने की मांग की है। पीड़ित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जमीन नहीं लौटी तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
प्रेस वार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष लालू राठौर, शंकर कुड़ियम, कमलेश कारम, प्रवीण डोंगरें, मनोज अवलम, जितेंद्र हेमला सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद रहे।



