Growing imbalance in Bastar-Kanker: All communities demand concrete action from the government; all communities will unite today for a movement to protect tribal culture.
सर्व समाज की ओर से श्री ईश्वर कावड़े और श्री कमल किशोर कश्यप ने आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट शब्दों में कहा कि बस्तर और कांकेर के लोग अब केवल चिंता व्यक्त करने की स्थिति में नहीं हैं, बल्कि निर्णायक हस्तक्षेप की माँग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से जिस तरह से धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियाँ गाँव-गाँव में फैल रही हैं, ग्राम परंपराओं को तोड़ा जा रहा है और जनजातीय समाज की सामाजिक संरचना को कमजोर किया जा रहा है, वह सीधे तौर पर क्षेत्र की शांति और भविष्य पर हमला है। यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित प्रक्रिया है, जिसे अगर अभी नहीं रोका गया तो इसके परिणाम नॉर्थ ईस्ट जैसे होंगे।
श्री कावड़े ने मिज़ोरम और अन्य नॉर्थ ईस्ट राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ भी जनजातीय समाज को भारत के संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष संरक्षण मिला हुआ है। वहाँ स्वायत्त जिला परिषदें हैं, स्थानीय कानून बनाने का अधिकार है, भूमि और संसाधनों पर बाहरी हस्तक्षेप रोकने की संवैधानिक व्यवस्था है। इसके बावजूद वहाँ की जनजातीय धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान लगभग समाप्त हो चुकी है। आज मिज़ोरम में जनजातीय पहचान केवल प्रशासनिक और संवैधानिक दस्तावेज़ों तक सीमित रह गई है, जबकि पारंपरिक देवी-देवता, ग्राम पूजा, सामूहिक संस्कार और सांस्कृतिक जीवन समाप्ति के कगार पर पहुँच चुके हैं।
उन्होंने कहा कि मिज़ोरम में भी शुरुआत बिल्कुल इसी तरह हुई थी—सेवा, शिक्षा, इलाज और सहायता के नाम पर। धीरे-धीरे स्थानीय आस्थाओं को कमजोर किया गया, पारंपरिक देवताओं को गलत बताया गया और समाज को अपने ही संस्कारों से काट दिया गया। परिणाम यह हुआ कि आज वहाँ जनजातीय समाज की धार्मिक-सांस्कृतिक आत्मा खत्म हो चुकी है, जबकि संवैधानिक सुरक्षा कागज़ों में बनी हुई है। श्री कावड़े ने कहा कि यह एक गंभीर चेतावनी है कि केवल कानून और अनुसूची अपने-आप किसी समाज को नहीं बचा सकती, यदि जमीनी स्तर पर समय रहते हस्तक्षेप न किया जाए।
उन्होंने साफ कहा कि बस्तर और कांकेर का समाज यह नहीं चाहता कि यहाँ भी वही स्थिति बने—जहाँ जनजातीय समाज नाम मात्र का रह जाए और उसकी संस्कृति, परंपरा और सामूहिक जीवन समाप्त हो जाए। उन्होंने कहा कि आज बस्तर में भी वही संकेत दिखाई दे रहे हैं—ग्राम पूजा से दूरी, शीतला माता की परंपरा का टूटना, विवाह और मृत्यु संस्कारों से अलगाव, ग्राम सभा के फैसलों की अवहेलना और इसके बावजूद अनुसूचित जनजाति के प्रमाण पत्र, आरक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना। यही दोहरा मापदंड समाज को भीतर से तोड़ रहा है।
श्री ईश्वर कावड़े ने स्पष्ट किया कि सर्व समाज कल होने वाले आंदोलन को किसी भावनात्मक प्रतिक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि एक आवश्यक सामाजिक हस्तक्षेप के रूप में देख रहा है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी धर्म या व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस प्रक्रिया के खिलाफ है जो जनजातीय समाज को धीरे-धीरे उसकी जड़ों से काट रही है। यह आंदोलन इस बात की माँग है कि संविधान की भावना के अनुसार जनजातीय ,एवं सर्व समाज के अधिकारों की रक्षा हो, न कि उनके नाम पर दुरुपयोग।
उन्होंने बस्तर और कांकेर के सभी नागरिकों—आदिवासी समाज, सर्व समाज, किसान, मजदूर, व्यापारी, महिलाएँ, युवा और सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवी, समेत हर वर्ग—से आह्वान किया कि वे कल के शांतिपूर्ण आंदोलन में बड़ी संख्या में शामिल हों। उन्होंने कहा कि यह केवल एक दिन का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल है। यदि आज समाज एकजुट होकर खड़ा नहीं हुआ, तो कल बहुत देर हो जाएगी।
अपने वक्तव्य के अंत में ने कहा गया कि यह धरती वीर गुंडाधुर और वीर नारायण सिंह की धरती है, जहाँ अन्याय के सामने झुकना कभी परंपरा नहीं रही। आज वही परंपरा निभाने का समय है। उन्होंने कहा कि यह आवाज़ किसी एक समाज की नहीं, बल्कि पूरे सर्व समाज की सामूहिक चेतावनी है—अब या तो समय रहते रोक लगेगी, या फिर इसके परिणाम इतिहास में दर्ज होंगे।
सर्व समाज की प्रमुख मांगे है
–* जो व्यक्ति धर्म परिवर्तन करता है, उसे अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति की सूची से तत्काल बाहर किया जाए और उसका ST और sc दर्जा निरस्त किया जाए।
* कांकेर एवं बस्तर के सभी जनजातीय क्षेत्रों में जारी ST, sc प्रमाण पत्रों की व्यापक, निष्पक्ष और समयबद्ध जाँच कराई जाए।
.- अवैध धर्मांतरण के लिए तत्काल सदन में प्रस्तुत कर कड़े कानून बनाया जाना चाहिए ।
* धर्मांतरित व्यक्तियों को आरक्षित सरकारी नौकरी, चुनाव, राजनीतिक पद और सभी आरक्षित लाभों से वंचित किया जाए।
* ग्राम सभा की अनुमति और वैधानिक प्रक्रिया के बिना संचालित अवैध चर्च एवं प्रार्थना-स्थलों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
* क्षेत्र में सक्रिय मसीही मिशनरी संगठनों एवं NGO की फंडिंग, स्रोत और गतिविधियों की उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए।
* ग्राम सभा के निर्णयों को कानूनी बाध्यता दी जाए और उनके उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
* शीतला माता, ग्राम देवी, देवगुड़ी, माता-स्थान, बूढ़ा देव एवं अन्य पारंपरिक पूजा-स्थलों को कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाए।
* ST,एससी योजनाओं लाभ लेने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और अब तक लिए गए लाभों की समीक्षा की जाए।
* लालच, दबाव, भय, सेवा या सहायता के नाम पर किए गए धर्मांतरण को गंभीर अपराध मानते हुए सख़्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
* जिन मामलों में ग्राम समाज, पूजा-स्थल या सामाजिक व्यवस्था को नुकसान पहुँचा है, वहाँ विशेष जाँच दल गठित किए जाएँ।
* बस्तर एवं कांकेर क्षेत्र के लिए स्पष्ट, लिखित और लागू करने योग्य नीति बनाई जाए, जिससे भविष्य में ऐसे विवाद दोबारा न हों।
प्रेस कांफ्रेंस में प्रमुख रूप से रामचंद्र मंडावी ,टेकेश्वर शंकर जैन,राजू नेताम,मनीष जैन,उत्तम जैन,राजेश कलिहारी,घनेनद्र ठाकुर,पीयूष वलेचा ,चिन्मय लोनहारे ,सुनील ठाकुर,दाऊ लाल सोनवानी,प्रवेश चौहान,हर्ष फ़ब्यानी समेत अन्य उपस्थित थे ।



