Two minor students died while undergoing treatment in Bijapur. Nagmani, the collector, said that a full disclosure will be made after the investigation.
किरण दूत को कलेक्टर ने दिया बयान
बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला -जिले से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। अलग-अलग घटनाओं में इलाज के दौरान दो नाबालिग छात्रों की मौत हो गई। इन मौतों के बाद पूरे क्षेत्र में शोक के साथ-साथ आक्रोश का माहौल है और ग्रामीण अंचलों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गए हैं।
पहला मामला – 12 वर्षीय छात्रा की मौत
उसूर विकासखंड के ग्राम गुडंम निवासी 12 वर्षीय छात्रा पोटा केबिन चिंताकोटा में अध्ययनरत थी। परिजनों के अनुसार बीते दो-तीन दिनों से छात्रा के चेहरे में सूजन, हल्की उल्टी-दस्त और सर्दी की शिकायत थी। हालत बिगडऩे पर सोमवार सुबह करीब 8 बजे उसे आवापल्ली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया।
यहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर करने की सलाह दी। छात्रा को जिला चिकित्सालय बीजापुर लाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। जगदलपुर रेफर किए जाने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया।
दूसरा मामला – मलेरिया से पीडि़त छात्र की मौत
दूसरी घटना में छात्रावास गुदमा में अध्ययनरत कक्षा 6वीं के छात्र निवासी ताडमेड, कुटरू, की मौत हो गई।
बताया गया कि शनिवार को जांच के दौरान मलेरिया किट से रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके बाद उसे कुटरू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कर प्राथमिक इलाज किया गया। स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर उसे जिला चिकित्सालय बीजापुर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
दोनों घटनाओं के बाद परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने इलाज में लापरवाही की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। हो रही ऐसी घटनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं।
अधीक्षकों के बयान
छात्रावास गुदमा के अधीक्षक प्रकाश पदम ने बताया कि शनिवार को किट के माध्यम से जांच में मलेरिया पॉजिटिव पाया गया था। उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुटरू में भर्ती कराया गया और परिजनों को सूचना दी गई। हालत में सुधार नहीं होने पर बीजापुर रेफर किया गया, जहां उसकी मौत हो गई। उन्होंने यह भी बताया कि छात्रावास का एक अन्य छात्र भी मलेरिया पॉजिटिव था, जिसका इलाज जारी है और उसकी हालत अब ठीक है।
वहीं पोटा केबिन चिंताकोटा की अधीक्षिका कमला ककेम ने बताया कि तबीयत दो–तीन दिन पहले से खराब थी। चेहरे, हाथ-पैर में सूजन, उल्टी और सर्दी की शिकायत पर उसे उप स्वास्थ्य केंद्र आवापल्ली में दिखाया गया था। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उसे अस्पताल लाया गया, जहां बीजापुर रेफर के बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। छात्रा की बड़ी मम्मी पोटा केबिन में ही कर्मचारी हैं, जिन्हें समय पर जानकारी दी गई थी।
कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश
मामले में जब जिला कलेक्टर संबित मिश्रा से बातचीत की गई तो उन्होंने इसे अत्यंत दुखद घटना बताया। उन्होंने कहा कि कहां चूक हुई और किनकी लापरवाही रही, इसकी जांच एसडीएम स्तर पर कराई जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
दो मासूम जिंदगियों की इस तरह असमय मौत ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।
पूरे मामले में क्षेत्र के जनपद सदस्य ने कहा कि यहां गंभीर मामला इसकी निष्पक्षता से जांच कर उचित कार्रवाई की प्रशासन से की मांग ।


