मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट
मुंगेली – रायपुर/छत्तीसगढ़। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ‘बिहान’ योजना में कार्यरत सीआरपी (कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन) एवं सक्रिय महिलाओं ने अपनी बहुप्रतीक्षित मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छत्तीसगढ़ के समस्त सीआरपी/सक्रिय महिलाओं के प्रतिनिधि संगठन एनआरएलएम बिहान – सीआरपी/सक्रिय महिला संघ, छत्तीसगढ़ (पंजीयन क्रमांक 116635) के बैनर तले मुख्यमंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री, मुख्य सचिव, सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा एसआरएलएम संचालक के नाम 17 दिसंबर 2025 को एक विस्तृत ज्ञापन दिया गया!
संघ की संरक्षक बिंदु यादव, अध्यक्ष पदमा पाटिल एवं सलाहकार विश्वजीत हारोडे व लोरमी ब्लाक अध्यक्ष मंजू यादव, सचिन शबनम अंसारी, एवं लोरमी ब्लांक की समस्त सक्रिय महिला के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि एनआरएलएम के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सपना तभी साकार हो सकता है, जब इस योजना की रीढ़ कही जाने वाली सीआरपी/सक्रिय महिलाओं को सम्मानजनक मानदेय, सुरक्षा और अधिकार दिए जाएं।
प्रधानमंत्री के प्रशंसा भाषण का हवाला
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि 15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनआरएलएम के कार्यों की सराहना की थी, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि उसी मिशन को सफल बनाने वाली सीआरपी/सक्रिय महिलाएं आज शोषण, असुरक्षा और उपेक्षा का शिकार हैं।
गांव-गांव सरकार की योजनाओं का भार
सीआरपी/सक्रिय महिलाएं गांव स्तर पर स्वयं सहायता समूहों का गठन, बैठकें, पुस्तक संधारण, बैंक खाते खुलवाना, लोन दिलवाना, ऑडिट, बीमा, क्लेम, आजीविका सर्वे, कृषि-पशुपालन से जुड़ा पूरा डाटा संग्रह, मनरेगा, लखपति दीदी, लोकोस, वीपीआरपी सहित अनेक योजनाओं का ऑफलाइन व ऑनलाइन कार्य करती हैं। इसके अलावा स्वच्छता अभियान, जल जीवन मिशन, वृक्षारोपण, आंगनबाड़ी कार्यक्रम, आयुष्मान कार्ड, आवास सर्वे, ओबीसी सर्वे, खेल महोत्सव जैसे गैरविभागीय कार्य भी बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के कराए जाते हैं।
1910 रुपये मानदेय पर जीवन असंभव
महिलाओं का कहना है कि उन्हें मात्र 1910 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है, जो आज की महंगाई में न तो जीवन यापन के लिए पर्याप्त है और न ही कार्य खर्च निकालने के लिए। जबकि महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सक्रिय महिलाओं को केंद्र व राज्य सरकार मिलकर 6000 रुपये प्रतिमाह दे रही हैं।
निजी मोबाइल, निजी खर्च – फिर भी कोई भत्ता नहीं
ज्ञापन में बताया गया कि ऑनलाइन कार्य के लिए महिलाओं को अपने निजी एंड्रॉयड मोबाइल का उपयोग करना पड़ता है। 15-20 हजार के मोबाइल और 300-350 रुपये मासिक रिचार्ज का खर्च इसी अल्प मानदेय से उठाना पड़ता है। प्रशिक्षण, मीटिंग और फील्ड कार्य के लिए क्लस्टर व जनपद तक आने-जाने का कोई यात्रा भत्ता भी नहीं मिलता।
भुगतान में देरी और कटौती का आरोप
कई जिलों में 1910 रुपये का मानदेय भी 5-6 महीने में एक बार दिया जाता है। कहीं नकद भुगतान, तो कहीं बिना कारण कटौती की शिकायतें भी सामने आई हैं। वहीं शासन द्वारा तय प्रोत्साहन राशि (लोकोस, वीपीआरपी, लखपति दीदी) अधिकांश जगहों पर अब तक नहीं दी गई है।
जबरन हटाने का आरोप
संघ ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्षों से कार्यरत सक्रिय महिलाओं को बिना कारण जबरदस्ती काम से हटाया जा रहा है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
*प्रमुख मांगें*
संघ ने सरकार से मांग की है कि—
मानदेय को सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाया जाए और न्यूनतम वेतन अधिनियम के अनुसार भुगतान हो।
सभी कैडरों को मोबाइल, इंटरनेट खर्च, दैनिक व यात्रा भत्ता दिया जाए।
प्रोत्साहन राशि का तत्काल भुगतान हो।
जबरन हटाने की प्रक्रिया बंद की जाए।
नियुक्ति पत्र जारी कर नियमितीकरण किया जाए।
मानदेय हर माह सीधे बैंक खाते में समय पर ट्रांसफर हो।
सीआरपी/सक्रिय महिलाओं को कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
सरकार से तत्काल निर्णय की मांग
एनआरएलएम बिहान सीआरपी/सक्रिय महिला संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर की सक्रिय महिलाएं आंदोलन के लिए मजबूर होंगी। समस्त सीआरपी/सक्रिय महिलाएं, छत्तीसगढ़



