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मस्तूरी के श्रीमद् भागवत कथा में श्रीकृष्ण बाल लीला, माखन चोरी एवं गोवर्धन पूजा के भजन तथा प्रसंग सुनकर श्रद्धालु हुए भाव विभोर नाचने पर हुए विवश

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*प्रमोद अवस्थी मस्तूरी*

मस्तूरी।स्वर्गीय रामकृष्ण तिवारी के वार्षिक श्रद्धा के अवसर पर तिवारी परिवार के द्वारा संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के दौरान व्यास पीठ से घघरा खरसिया के पंडित श्री दीपक कृष्ण महाराज ने आज श्रीकृष्ण बाल लीला, माखन चोरी एवं गोवर्धन पूजा का संगीत मय कथा सुनाए प. दीपक कृष्ण महाराज के संगीत मय प्रसंग सुनकर श्रद्धालु हुए भाव विभोर पंडित जी ने श्रीकृष्ण बाल लीला, माखन चोरी एवं गोवर्धन पूजा के प्रसंग का कथा का वर्णन किया। प .दीपक जी ने कहा कि श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलाधार वर्षा से बचाने के लिए सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उंगली तर्जनी पर उठाकर रखा और गोप-गोपिकाएं उसकी छाया में सुखपूर्वक रहे।

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सातवें दिन भगवान ने गोवर्धन पर्वत को नीचे रखा और हर वर्ष गोवर्धन पूजा करके अन्नकूट उत्सव मनाने की आज्ञा दी। तभी से यह उत्सव अन्नकूट के नाम से मनाया जाने लगा। इसके बाद भागवताचार्य श्री दीपक जी महाराज ने श्रीकृष्ण भगवान के माखन चोरी की कथा सुनाई। कथा सुनकर प्रभु भक्त भाव विभोर हो कर संगीत मय कथा में अपने आप को नृत्य करने को नहीं रोक पाए भागवत आचार्य ने श्रीकृष्ण की माखन चोरी की लीला का वर्णन करते हुए कहा कि जब श्रीकृष्ण भगवान पहली बार घर से बाहर निकले तो उनकी बृज से बाहर मित्र मंडली बन गई। सभी मित्र मिलकर रोजाना माखन चोरी करने जाते थे। सब बैठकर पहले योजना बनाते की किस गोपी के घर माखन की चोरी करनी है। श्रीकृष्ण माखन लेकर बाहर आ जाते और सभी मित्रों के साथ बांटकर खाते थे। भगवान बोले जिसके यहां चोरी की हो उसके द्वार पर बैठकर माखन खाने में आनंद आता है। माखन चोरी की लीला का बखान करते हुए उन्होंने घंटी का सुंदर ढंग से वर्णन किए तथा भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप का सुंदर प्रकार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण बचपन से ही नटखट थे।

भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं से जुड़ी कथा को सुनने व अधिकाधिक संख्या में यज्ञ व कथा में भागीदार बनने के लिए भक्तों में भारी उत्साह और जोश दिखाई दिया। श्रीमद् भागवत कथा के दौरान भारी संख्या में भक्तगणों की उपस्थिति रही।

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