The FIR orders were suppressed, so how did they get forest rights leases on the land that was supposed to be sealed?
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कांकेर | उत्तर बस्तर कांकेर जिले के चारामा तहसील में शासकीय सीलिंग भूमि से जुड़ा एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ शासन के स्पष्ट आदेशों को नजरअंदाज करते हुए नियमों के विपरीत वन अधिकार पट्टा प्रदान कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कांकेर द्वारा शासन के ज्ञापन क्रमांक 897/अविअ/रीडर-1/2018 दिनांक 28-03-2018 के माध्यम से तहसीलदार चारामा को गजेंद्र पाटनवार पिता जगलाल, निवासी ग्राम मैंनखेड़ा के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके, आज दिनांक तक न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही आदेश का पालन किया गया।
हैरत की बात यह है कि जिस व्यक्ति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होनी थी, उसी को खसरा नंबर 112 में से 2.0280 हेक्टेयर शासकीय सीलिंग एवं घास-मद भूमि पर वन अधिकार पट्टा प्रदान कर दिया गया। यह नामांतरण राजस्व प्रकरण क्रमांक 00105/बी-121/2021-22, आदेश दिनांक 13 अगस्त 2021 के तहत किया गया, जबकि उक्त प्रकरण को दिनांक 04/02/2021 को नस्तीबद्ध किया गया है। तो उक्त व्यक्ति के द्वारा कब और किस न्यायालय में वन अधिकार पट्टा प्रदाय करने प्रकरण दर्ज किया गया, राजस्व कानूनों के जानकारों के अनुसार, सीलिंग एवं घास-मद भूमि पर न तो निजी स्वामित्व दिया जा सकता है और न ही वन अधिकार पट्टा। ऐसे में यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि शासन आदेशों की अवहेलना और भूमि नियमों के दुरुपयोग की ओर संकेत करता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि
एफआईआर क्यों नहीं हुई?
भूमि का मद किसके आदेश से बदला गया? और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?





