*संत गुरु घासीदास कला विज्ञान एवं शिक्षा महाविद्यालय पचपेड़ी में शोभा यात्रा का हुआ भव्य आयोजन*
*प्रमोद अवस्थी मस्तूरी*
मस्तूरी। मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र के संत गुरु घासीदास कला, विज्ञान एवं शिक्षा महाविद्यालय पचपेड़ी में सतनाम पंथ के प्रवर्तक, सामाजिक समानता एवं मानवता के प्रणेता परम पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी की जयंती के पावन अवसर पर आज भव्य, अनुशासित एवं प्रेरणादायी शोभायात्रा का आयोजन किया गया। यह शोभायात्रा महाविद्यालय परिसर से प्रारंभ होकर प्रमुख मार्गो से मिनीमाता गुरुद्वारा, पचपेड़ी तक शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई।
इस शोभायात्रा में महाविद्यालय के विद्यार्थियों कीउत्साहपूर्ण एवं अनुशासित भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत पंथी नृत्य, सतनाम संदेशों की गूंज और अनुशासनबद्ध कदमताल ने पूरे आयोजन को जीवंत बना दिया, जो उपस्थित जनसमूह के आकर्षण का केंद्र रहा। विद्यार्थियों ने गुरु घासीदास बाबा जी के विचार—मनखे-मनखे एक समान—को अपने आचरण और प्रस्तुति के माध्यम से सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।
शोभायात्रा के सफल आयोजन में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रविन्द्र जायसी का मार्गदर्शन एवं विशेष सहयोग सराहनीय रहा, जिनके नेतृत्व में कार्यक्रम गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इस अवसर पर क्षेत्र की जनप्रतिनिधि श्रीमती सतकली बावरे (जिला पंचायत सदस्य) की उपस्थिति एवं सहयोग ने आयोजन को और अधिक गरिमा प्रदान की।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त स्टाफ—राधेश्याम पाटले, लक्ष्मी मधुकर, कन्हैया मधुकर, शालिनी, ममता, सुनीता कुर्रे, फेकू, परमेश्वर पाटेकर, बर्मन, परमजीत कुरैशी, संध्या कश्यप, दुर्गा, रजनीकांत, रिशु अग्रवाल, रश्मि जांगड़े, शोमी, अमेश सहित सभी कर्मचारीगण—सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। साथ ही महाविद्यालय के समस्त विद्यार्थियों की व्यापक सहभागिता ने शोभायात्रा को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
पूरे आयोजन के दौरान पचपेड़ी परिक्षेत्र के नागरिकों का सहयोग अत्यंत सराहनीय रहा। डॉ रविंद्र जायसी ने कहा कि परम पूज्य बाबा जी के संदेश को हमें और आपको जन-जन तक पहुंचाना है बाबा जी का यह शोभायात्रा सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना एवं गुरु घासीदास बाबा जी के मानवतावादी संदेशों को जन-जन तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बनी। आज के शोभा यात्रा में भारी संख्या में कॉलेज के छात्र-छात्राएं एवं ग्रामीण जनों की भरपूर सहभागिता रही ।



