In the Shiva Mahapurana story, the episode of Narada’s delusion was narrated, and devotees learned about the consequences of ego.
प्रमोद अवस्थी मस्तूरी
मस्तूरी।दलहा पोड़ी स्थित अघोर पीठ जन आश्रम में चल रही श्री शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान प्रख्यात कथा वाचक रामानुज सत्यम कृष्णा शुक्ला महाराज ने शिवलिंग की उत्पत्ति, शिव के वीर और लिंग रूप की पूजा का महत्व विस्तार से समझाया। कथा के दौरान उन्होंने नारद मोह प्रसंग का मार्मिक और शिक्षाप्रद वर्णन करते हुए बताया कि देवर्षि नारद मुनि जब तपस्या और कामदेव पर विजय प्राप्त कर लेते हैं, तो उन्हें अपने भीतर अहंकार उत्पन्न हो जाता है। इस अहंकार को दूर करने हेतु भगवान विष्णु उन्हें अपनी माया में फसाए
रामानुज सत्यम कृष्णा ने बताया कि भगवान विष्णु नारद के मार्ग में एक सुंदर राजकुमारी विश्व मोहिनी का निर्माण करते हैं, जिसे देखकर नारद मोहित हो जाते हैं और उससे विवाह की कामना करते हैं। वे भगवान विष्णु से ‘हरि रूप’ मांगते हैं, लेकिन विष्णु जी उन्हें वानर का रूप प्रदान करते हैं। राजकुमारी के स्वयंवर में जब नारद को वानर रूप में देखकर सभी उपहास करते हैं, तब उन्हें अपने अहंकार और मोह का परिणाम समझ आता है। यह प्रसंग मनुष्य को यह शिक्षा देता है कि अहंकार और माया में उलझ कर कोई भी व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप से दूर हो जाता है। कथा वाचक रामानुज सत्यम ने शिव तत्व और कैलाश प्राप्ति का आध्यात्मिक महत्व भी श्रोताओं को बड़े ही सुंदर ढंग से समझाये उन्होंने कहा कि शिव की आराधना केवल रूप, रिवाज या पूजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वयं के भीतर स्थित सत्य, शांति और समर्पण की खोज का माध्यम बनता है हमे और आप को भी अहंकार कदापि नहीं करनी चाहिए।
कथा के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालुओ की उपस्थिति रही।



