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100% दिव्यांग महिला आज भी सहारे की आस में, चलने-फिरने को तरस रही जिंदगी

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A 100% disabled woman is still longing for support, yearning for the ability to walk and move around.

मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट

Ro.No - 13672/156

दोनों पैर और एक हाथ नहीं, फिर भी नहीं मिला ट्राइसाइकिल का सहारा
जनदर्शन में आवेदन के बाद भी प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल

मुंगेली/लोरमी।- विकासखंड लोरमी अंतर्गत ग्राम पंचायत रहंगी की निवासी मालती यादव (35 वर्ष) की जिंदगी आज भी संघर्षों से भरी हुई है। मालती यादव 100 प्रतिशत दिव्यांग हैं — उनके दोनों पैर नहीं हैं और एक हाथ भी नहीं है, जिसके कारण दैनिक जीवन की सामान्य गतिविधियाँ भी उनके लिए बेहद कठिन हो गई हैं।
चलने-फिरने के लिए किसी साधन के अभाव में मालती यादव घर से बाहर निकलने में भी असमर्थ हैं। इलाज, शासकीय योजनाओं का लाभ लेने, राशन दुकान या किसी जरूरी कार्य के लिए भी उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस स्थिति में उनके लिए ट्राइसाइकिल एकमात्र सहारा हो सकता है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।
ट्राइसाइकिल की नितांत आवश्यकता
ग्रामीणों का कहना है कि मालती यादव की स्थिति अत्यंत दयनीय है। परिवार की आर्थिक हालत भी कमजोर है, ऐसे में निजी साधन खरीद पाना संभव नहीं है। शासन द्वारा दिव्यांगजनों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ यदि समय पर मिल जाए, तो उनके जीवन में बड़ा बदलाव आ सकता है।
सरपंच और जनप्रतिनिधियों ने उठाई आवाज
ग्राम पंचायत रहेगी की सरपंच श्रीमती सुखमनी भगवान सिंह पोर्ते द्वारा इस गंभीर विषय को लेकर जिला कलेक्टर मुंगेली के समक्ष जनदर्शन में आवेदन प्रस्तुत किया गया है। आवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि मालती यादव को तत्काल ट्राइसाइकिल प्रदान की जाए, ताकि उनकी आवाजाही सुगम हो सके।
इस मांग को जनपद पंचायत क्षेत्र क्रमांक-06 के जनपद सदस्य रानी दीदी देव मार्को, कृष्ण यादव, सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का भी समर्थन प्राप्त है। सभी ने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है।
सरकारी योजनाओं पर उठे सवाल
प्रशासनिक उदासीनता के चलते यदि एक 100% दिव्यांग महिला को बुनियादी सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है, तो यह दिव्यांग कल्याण योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि ट्राइसाइकिल जैसी मूलभूत सहायता भी यदि समय पर न मिले, तो योजनाओं का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
अब प्रशासन की संवेदनशीलता की परीक्षा
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन कब तक इस मामले में संज्ञान लेकर मालती यादव को ट्राइसाइकिल प्रदान करता है, जिससे उनका जीवन कुछ हद तक आसान बन सके और वे सम्मान के साथ अपना जीवन जी सकें।

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