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बस्तर पण्डुम के आयोजन एवं क्रियान्वयन को लेकर समाज प्रमुखों से की गई रायशुमारी

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Consultations were held with community leaders regarding the organization and implementation of the Bastar Pandum festival.

एक दिवसीय जिला स्तरीय आयोजन 28 जनवरी को भीरावाही में
बैठक लेकर सुझाव आमंत्रित किए गए

Ro.No - 13672/156

उत्तर बस्तर कांकेर, 09 जनवरी 2026/ बस्तर संभाग की जनजातीय संस्कृति, स्थानीय कला, पारंपरिक लोक गीत, लोक नृत्य, व्यंजन, परिधान, पेय पदार्थों के मूल संरक्षण एवं संवर्धन करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा बस्तर पण्डुम -2026 का आयोजन किया जा रहा है। इसके सफल क्रियान्वयन एवं सामाजिक जनों की अधिकाधिक सहभागिता सुनिश्चित करने आज जिला पंचायत के सीईओ श्री हरेश मंडावी द्वारा समाज प्रमुखों की बैठक ली गई। इस दौरान उन्होंने जिला स्तरीय सामाजिक प्रतिनिधियों से सुझाव आमंत्रित किए गए तथा मार्गदर्शन प्राप्त किए गए। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बस्तर पण्डुम का एक दिवसीय जिला स्तरीय आयोजन आगामी 28 जनवरी को ग्राम भीरावाही के गोंडवाना भवन में किया जाएगा।

जिला पंचायत के सभाकक्ष में आज शाम 4.30 बजे आहूत बैठक में कार्यक्रम स्थल, आयोजन समितियों का गठन, प्रतिभागियों के ठहरने एवं भोजन की व्यवस्था, अधिकाधिक कलाकारों की सहभागिता तथा सिलसिलेवार विधाओं की बेहतर प्रस्तुति पर द्विपक्षीय चर्चा की गई। इसके अलावा आयोजन के उद्देश्य को दृष्टिगत रखते हुए बस्तर की जनजातीय पारंपरिक विरासत व संस्कृति को सहेजने तथा लुप्तप्राय आदिवासी सभ्यता को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया गया। साथ ही जिला पंचायत के सीईओ एवं बस्तर पण्डुम के नोडल अधिकारी श्री मंडावी ने उपस्थित सभी समाज प्रमुखों को आवश्यक सहयोग करने की अपील की। बैठक में यह भी तय किया गया कि पारंपरिक पूजा पद्धति से जुड़े गायता, पटेल, पुजारी आदि के माध्यम से आयोजन की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। सीईओ ने विधावार तैयारियां सुनिश्चित करने और सामूहिक, युगल और एकल प्रस्तुतियों में पूर्व से तैयारियां एवं जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही परस्पर समन्वय स्थापित करने की बात उन्होंने कही।

उल्लेखनीय है कि बस्तर पण्डुम में 12 विधाओं को सम्मिलित किया गया है जिसमें बस्तर जनजातीय नृत्य, जनजातीय गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, पारंपरिक वेशभूषा एवं आभूषण, जनजातीय पूजा पद्धति, बस्तर शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, व्यंजन आंचलिक साहित्य और बस्तर वनौषधि का प्रदर्शन व प्रस्तुति शामिल है। इन विधाओं में स्थानीय कलाकारों को उचित प्लेटफॉर्म देने पर भी समाज प्रमुखों के साथ परस्पर चर्चा की गई। इस दौरान कांकेर एसडीएम श्री अरुण वर्मा, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास सुश्री जया मनु, जिला शिक्षा अधिकारी सहित विभिन्न जनजातीय समाज के प्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

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