Allegations of arson at a shop under construction; the victim has filed a complaint at the police station.
मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट
= आरोपी पर गाली-गलौच व जान से मारने की धमकी का भी आरोप
मुंगेली/लोरमी।– थाना लोरमी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम डिंडौल में निर्माणाधीन दुकान में आगजनी किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित रेवाराम यादव ने थाना प्रभारी लोरमी को लिखित शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि सुरेन्द्र साहू द्वारा जानबूझकर उनके निर्माणाधीन दुकान में तोड़फोड़ कर आग लगा दी गई, प्रार्थी रेवाराम यादव के अनुसार घटना दिनांक 10 जनवरी 2026 की रात्रि लगभग 10 बजे की है। आरोप है कि सुरेन्द्र साहू उनके निर्माणाधीन दुकान के पास पहुंचा और उनकी बहन के गाली-गलौच करते हुए जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद दुकान में रखे बांस, बल्ली, पर्दा, कैरेट सहित अन्य सामग्री में आग लगा दी गई। आगजनी की घटना में दुकान का सैटिंग लकड़ी भी गिर गया और सारा सामान जलकर राख हो गया।
पीड़ित ने बताया कि उक्त दुकान से संबंधित मामला तहसील न्यायालय लोरमी में लंबित है तथा न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश भी जारी किया गया है। स्थगन आदेश का पालन करते हुए उन्होंने दुकान में किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं कराया था। इसके बावजूद आरोपी द्वारा विवाद को लेकर इस तरह की आपराधिक घटना को अंजाम दिया गया।
रेवाराम यादव ने शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि घटना की सूचना रात्रि करीब 10:30 बजे कोटवार द्वारा उनके घर आकर दी गई, जिसमें बताया गया कि पटवारी दुकान के पास बुला रहा है। जब वे मौके पर पहुंचे तो देखा कि लकड़ियां, बांस, पर्दा और कैरेट जल रहे थे तथा दुकान की छत का सैटिंग लकड़ी गिरा पड़ा था। घटना के समय मौके पर धर्मेन्द्र यादव, कौशल राजपूत, सोनू यादव, राजेन्द्र यादव सहित अन्य लोग मौजूद थे, जो इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी बताए जा रहे हैं।
पीड़ित ने थाना प्रभारी से मांग की है कि आरोपी सुरेन्द्र साहू पिता मालिक राम साहू के विरुद्ध आगजनी, तोड़फोड़, गाली-गलौच एवं जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर अपराधों के तहत एफआईआर दर्ज कर त्वरित व कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
मामले की प्रतिलिपि अनुविभागीय अधिकारी लोरमी एवं तहसीलदार लोरमी को भी प्रेषित की गई है। अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित को न्याय कब तक मिल पाता है।



