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मस्तूरी विकास खंड के दर्री घाट मंडल में विशाल हिंदू सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न

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A massive Hindu conference was successfully held in Darri Ghat Mandal of Masturi development block.

मस्तूरी विकास खंड के दर्री घाट मंडल अंतर्गत सरस्वती शिशु मंदिर, दर्री घाट में आज एक विशाल एवं भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया, जो पूर्णतः सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में क्षेत्र के विभिन्न समाजों की मातृशक्तियों, वरिष्ठ नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं प्रबुद्धजनों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके पश्चात भारत माता पूजन एवं भारत माता की आरती संपन्न की गई। संपूर्ण वातावरण धार्मिक चेतना, राष्ट्रभक्ति एवं सांस्कृतिक गौरव से ओत-प्रोत रहा। इसके बाद हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया।

इस अवसर पर शिलू सदाफले ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में समाज में “पंच परिवर्तन” की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्र और समाज के निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका केंद्रीय और निर्णायक होती है। उन्होंने संस्कार, स्वावलंबन, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभक्ति को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में रामधन रजक (समाजसेवी, बिलासपुर) की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने हिंदू समाज की एकता, संगठनात्मक सशक्तिकरण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण पर अपने विचार रखे और ऐसे आयोजनों को समाज को जोड़ने वाला बताया।

मुख्य वक्ता का विस्तृत उद्बोधन

सम्मेलन के मुख्य वक्ता आकाश परिहार (सामाजिक सद्भाव प्रमुख) ने अपने ओजस्वी एवं विचारोत्तेजक उद्बोधन में भारत माता की संस्कृति, उसके संरक्षण तथा हिंदू गौरव के विषय में विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि संस्कृति, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत स्वरूप है, जिसकी रक्षा प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
परिहार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संघ समाज को संगठित कर राष्ट्र निर्माण के लिए चरित्रवान, संस्कारित और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक तैयार करता है। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग से संघ के रचनात्मक कार्यों से जुड़ने का आग्रह किया।

अपने उद्बोधन में उन्होंने पाँच परिवर्तन पर विशेष बल दिया—
1. सामाजिक समरसता – जाति, वर्ग और भेदभाव से ऊपर उठकर एकात्म समाज का निर्माण।
2. कुटुंब प्रबोधन – परिवार को संस्कारों की पहली पाठशाला बनाना।
3. स्वदेशी – स्वदेशी उत्पादों और विचारों को अपनाकर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम।
4. पर्यावरण संरक्षण – प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन शैली अपनाना।
5. नागरिक कर्तव्य बोध – अधिकारों के साथ कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन।

उन्होंने आह्वान किया कि यदि प्रत्येक नागरिक अपने जीवन में इन पाँच परिवर्तनों को अपनाए, तो सशक्त, समरस और आत्मगौरव से भरा भारत स्वतः निर्मित होगा।

कार्यक्रम शांतिपूर्ण, अनुशासित एवं अत्यंत प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से कामता वर्मा, जागेश्वर देवांगन, विनोद कश्यप,कामेश्वर राव, सुनील विश्वकर्मा, कमलेश कश्यप, संतराम कश्यप, शिवकुमार कश्यप, फागूराम यादव, सनत कैवर्त्य, रामधार वस्त्रकार, भागवत केवट, बरेठ आचार्य जी, संजय कश्यप, कैलाश पटेल, मुरली धर पटेल,दीपक गुप्ता, दीपक दुबे,बिनु धुरी,सभी आचार्यगण, मातृशक्ति एवं बड़ी संख्या में नागरिक बंधु उपस्थित रहे।

अंत में आयोजन समिति द्वारा सभी अतिथियों, वक्ताओं, मातृशक्तियों एवं उपस्थित नागरिकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया।

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