A smile returned to his face while selling the paddy: The story of farmer Uttam Prakash.
रायपुर / ग्राम मंगौरा के किसान उत्तम प्रकाश के लिए खेत सिर्फ ज़मीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि परिवार की उम्मीद है। सुबह अंधेरे से रात ढलने तक खेत में पसीना बहाने के बाद जब फसल घर आती है, तब सबसे बड़ा डर रहता है। उपार्जन केंद्र में धान बिकेगा या नहीं, सही तौल मिलेगी या नहीं, पैसा समय पर आएगा या नहीं। पहले के सालों में धान बेचने जाना मतलब पूरा दिन लाइन में खड़े रहना, कभी तौल में शक, तो कभी भुगतान को लेकर चिंता। कई बार मन ही मन टूट जाते थे। लेकिन इस साल हालात बदले।
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ शासन की पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था ने उत्तम प्रकाश जैसे किसानों को राहत दी। उत्तम प्रकाश ने कटकोना उपार्जन केंद्र में अपनी मेहनत की 46 क्विंटल धान की फसल बेची। भले ही उनका टोकन ऑफलाइन बना था, फिर भी तय दिन पर केंद्र पहुंचे और बिना किसी झंझट के धान बिक गया। केंद्र में बैठने की जगह थी, पानी था, छांव थी। डिजिटल कांटे से जब धान तौला गया तो दिल को सुकून मिला-अब किसी तरह का शक नहीं। उत्तम प्रकाश कहते हैं, “इस बार धान बेचते वक्त डर नहीं लगा, लगा कि हमारी भी सुनवाई है।” अब उन्हें भरोसा है कि पैसा समय पर मिलेगा। उसी पैसे से बच्चों की पढ़ाई चलेगी, घर के खर्च पूरे होंगे और अगली फसल की तैयारी भी अच्छे से हो पाएगी। उत्तम प्रकाश ने दिल से मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का धन्यवाद किया और कहा कि ऐसी व्यवस्था से किसान को सम्मान मिलता है। यह कहानी सिर्फ उत्तम प्रकाश की नहीं, बल्कि उन हजारों किसानों की है जिनके खेतों में इस बार धान के साथ-साथ भरोसा और उम्मीद भी पकी है।



