कार्रवाई के दौरान पथराव, तहसीलदार ने स्पष्ट की पूरी स्थिति
बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – नगर पालिका परिषद बीजापुर अंतर्गत नया बस स्टैंड के पीछे चट्टान पारा से लगे क्षेत्र में वन मद की भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध जिला प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई लगातार दो दिनों तक चली, जिसमें लगभग 100 अवैध मकानों को हटाया गया। उल्लेखनीय है कि उक्त क्षेत्र में पूर्व में भी जिला प्रशासन द्वारा तीन बार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा चुकी है, इसके बावजूद पुनः अवैध कब्जा कर लिया गया था।
वर्तमान कार्रवाई से पूर्व नगर पालिका परिषद बीजापुर द्वारा अतिक्रमणकारियों को तीन बार नोटिस जारी कर स्वयं अतिक्रमण हटाने का अवसर दिया गया था, किंतु इसके बावजूद कब्जा नहीं हटाए जाने पर प्रशासन को सख्त कदम उठाना पड़ा।
कार्रवाई के दौरान नक्सल प्रभावित कुछ परिवारों के आवास भी हटाए जाने को लेकर उठे सवालों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए तहसीलदार पंचराम सलामे ने बताया कि सलवा जुडूम के दौरान नक्सल प्रभावित परिवार शांति नगर, शिविर पारा (गंगालूर रोड) एवं पनारापारा जेल बाड़ा क्षेत्र में पहले से बसे हुए हैं। इसके बावजूद कुछ लोगों द्वारा चट्टान पारा क्षेत्र में वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा किया गया था।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्रशासन को ऐसे मामलों की सूचना मिली है, जहां कुछ लोगों ने पहले कब्जा की गई भूमि को बेचकर पुनः अवैध अतिक्रमण किया, जो गंभीर एवं दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
कुछ डीआरजी जवानों के मकान तोड़े जाने को लेकर उठे सवालों पर तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि पुलिस प्रशासन द्वारा उनके लिए आवश्यक वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। कार्रवाई के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा विरोध स्वरूप पथराव की घटना भी सामने आई, हालांकि प्रशासनिक सतर्कता एवं सुरक्षा बलों की त्वरित कार्रवाई से स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया।
आज शाम तक की स्थिति…
दूसरे दिन किरण दूत की पड़ताल में सामने आया कि अतिक्रमण हटाए गए लोगों में अब भी आक्रोश बना हुआ है और वे नियमों के तहत वैकल्पिक भूमि की मांग कर रहे हैं। वहीं प्रशासन द्वारा चिन्हित किए गए शेष अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई अभी शेष है, जिस पर प्रभावित लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।
प्रशासन ने अतिक्रमण हटाए गए स्थलों से सामान तत्काल हटाने के निर्देश दिए हैं। क्षेत्र में फिलहाल तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और यह स्पष्ट है कि मामला अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।
अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है और स्थिति किस दिशा में जाती है।



