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निजी भूमि पर टिकाऊ परिसंपत्तियां, पंचायत-समुदाय की सहभागिता से विकसित हो रहा मॉडल

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Sustainable assets on private land, a model being developed through Panchayat-community participation

जल संरक्षण से आजीविका तक: छत्तीसगढ़ में ‘आजीविका डबरी’ अभियान बना ग्रामीण बदलाव की धुरी

Ro.No - 13672/156

‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान के तहत मनरेगा में ऐतिहासिक पहल

बारिश से पहले 10 हजार से अधिक आजीविका डबरी निर्माण का लक्ष्य

रायपुर, छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण, ग्रामीण रोजगार और सतत आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान के अंतर्गत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत आजीविका डबरी (फार्म पोंड) निर्माण का विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभिनव पहल के अंतर्गत प्रदेशभर में 10,000 से अधिक आजीविका डबरी का निर्माण कार्य प्रगति पर है। यह कार्य समाज के सबसे कमजोर वर्ग के हितग्राहियों की निजी भूमि पर किया जा रहा है, जिससे एक ओर वर्षा जल संरक्षण सुनिश्चित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर दीर्घकालीन एवं टिकाऊ आजीविका के अवसर सृजित किए जा रहे हैं।

अभियान के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के हितग्राहियों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि जल संसाधन और आवास आधारित आजीविका को एकीकृत रूप में मजबूत किया जा सके।
इस योजना के माध्यम से जहां मनरेगा के अंतर्गत स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हो रहा है, वहीं वर्षा जल संचयन को संस्थागत रूप से बढ़ावा मिल रहा है। आजीविका डबरी के माध्यम से अंतर्विभागीय अभिसरण के तहत कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं अन्य जल आधारित गतिविधियों की योजनाबद्ध रूप से रूपरेखा तैयार कर उनका क्रियान्वयन किया जाएगा।

प्रत्येक आजीविका डबरी का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप 20 मीटर × 20 मीटर × 3 मीटर आकार में किया जा रहा है। जल की गुणवत्ता और दीर्घकालीन टिकाऊपन सुनिश्चित करने के लिए इनलेट-आउटलेट व्यवस्था तथा सिल्ट अरेस्टिंग चैंबर की अनिवार्य व्यवस्था की गई है।इस अभियान में पंचायतों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। डबरी निर्माण कार्य का शुभारंभ पंचायत प्रतिनिधियों एवं ग्रामवासियों की उपस्थिति में किया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर विषय पर विस्तृत चर्चा कर हितग्राहियों की जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा की जा रही है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। साथ ही हितग्राहियों से आवश्यक अंशदान भी लिया जा रहा है, ताकि स्वामित्व और सहभागिता की भावना मजबूत हो।

आजीविका डबरी का निर्माण सैटेलाइट आधारित क्लार्ट ऐप के माध्यम से वैज्ञानिक ढंग से ‘रिज-टू-वैली एप्रोच’ पर किया जा रहा है। यह कार्य विभिन्न विभागों के अभिसरण के साथ कन्वर्जेन्स पैकेज के रूप में लागू किया जा रहा है। पंचायतों के साथ-साथ प्रदान, ट्राइफ, एफईएस सहित अन्य सिविल सोसायटी संगठनों का भी सक्रिय सहयोग प्राप्त हो रहा है।

सभी निर्माण कार्यों को बारिश से पूर्व पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रति आजीविका डबरी अधिकतम लागत तीन लाख रुपये तय की गई है। जल संरक्षण के साथ-साथ निजी भूमि पर टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण के माध्यम से यह पहल ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण, अभिनव और अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभर रही है।

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